हम साल भर मेहनत करके दालें उगाते हैं या महंगे दामों पर खरीदते हैं, लेकिन भंडारण के दौरान कुछ ही महीनों में घुन और कीड़े हमारी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। क्या आप जानते हैं कि दालों का 10 से 15 हिस्सा सिर्फ खराब भंडारण की वजह से बर्बाद हो जाता है? लेकिन अब चिंता की बात नहीं! लुधियाना की पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी ने एक ऐसी ‘प्रोटेक्शन किट’ तैयार की है जो बिना किसी जहरीले रसायन के आपकी दालों को सालों-साल सुरक्षित रखेगी।”
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) ने संग्रहित दालों को भंडारण कीटों से सुरक्षित रखने के लिए विकसित अपनी अभिनव ‘पीएयू प्रोटेक्शन किट’ के व्यावसायीकरण की दिशा में अहम कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने लुधियाना स्थित हैवार्ड इंडस्ट्रीज़ के साथ इसके लिए लाइसेंस समझौता किया है, जिससे यह तकनीक अब व्यापक स्तर पर बाजार में उपलब्ध हो सकेगी।
प्रोसेसिंग एवं फूड इंजीनियरिंग विभाग की भंडारण कीट विशेषज्ञ डॉ. मनप्रीत कौर सैनी ने बताया कि यह किट खुदरा पैकेटों और भंडारण कंटेनरों में रखी दालों को कीट संक्रमण से बचाने के लिए विकसित की गई है। यह तकनीक दालों की गुणवत्ता पर असर डाले बिना कीटों के लिए प्रतिकूल वातावरण तैयार करती है।
पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित इस समाधान की खासियत यह है कि इसे उपयोग करने के लिए किसी विशेष तकनीकी दक्षता की आवश्यकता नहीं होती। यह किफायती है और किसी भी प्रकार का हानिकारक रासायनिक अवशेष नहीं छोड़ता। इससे किसान, व्यापारी, खुदरा विक्रेता और छोटे भंडारण इकाइयाँ आसानी से लाभ उठा सकेंगी।
विश्वविद्यालय का मानना है कि इस किट से कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, भंडारण अवधि बढ़ेगी और दालों की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी। विशेष रूप से छोटे और सीमांत हितधारकों के लिए यह तकनीक लाभप्रदता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
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