पंजाब और हरियाणा में बेमौसम बारिश से धान तबाह: 4 हजार एकड़ फसल गिरी; मंडियों में भीगा अनाज

पंजाब और हरियाणा में अचानक आई बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल और अनाज मंडियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। पंजाब के मालवा क्षेत्र- बठिंडा, फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब में खेत जलमग्न हो गए हैं। अकेले मलोट के 5 गांवों में करीब 4,000 एकड़ धान बिछ गया है, जबकि फाजिल्का में बासमती को 15 से 20 फीसदी नुकसान का आकलन है। वहीं हरियाणा की करनाल, जींद और सिरसा मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल धान भीग गया है। किसान संगठनों ने तुरंत विशेष गिरदावरी कराने और सरकारी खरीद में 17% नमी सीमा में छूट देने की मांग उठाई है।

बेमौसम बारिश से धान तबाह

पंजाब और हरियाणा में बेमौसम बारिश व तेज हवाओं से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। खेतों में पकती फसल गिरने और मंडियों में खुले में रखे धान के भीगने से कटाई, सरकारी खरीद और उठान में देरी की आशंका बढ़ गई है।

मालवा में 4,000 एकड़ फसल गिरी

पंजाब के मालवा क्षेत्र के बठिंडा, फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब जिलों में जलभराव हुआ है। मुक्तसर के मलोट क्षेत्र के 5 गांवों में करीब 4,000 एकड़ फसल गिर गई, जबकि फाजिल्का ब्लॉक में 18 मिमी बारिश से बासमती धान को 15 से 20% नुकसान का शुरुआती अनुमान है। हरियाणा की करनाल, जींद और सिरसा मंडियों में भी खुले में रखा धान भीगने की शिकायतें मिली हैं।

हरियाणा मंडियों में तिरपाल का अभाव

हरियाणा में अनाज में अधिक नमी और चावल मिल मालिकों की हड़ताल के कारण पहले से ही खरीद प्रभावित थी। अब बारिश के बाद धीमी खरीद और उठान में देरी से मंडियों में जगह की कमी बढ़ गई है। किसानों ने आरोप लगाया है कि मंडियों में बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त तिरपाल और ढकने की व्यवस्था नहीं थी, जिससे खुले में रखी उपज को नुकसान हुआ।

17% नमी सीमा में छूट की मांग

किसान संगठनों ने प्रभावित फसलों का तत्काल गिरदावरी सर्वेक्षण कराने, जल निकासी की व्यवस्था करने और किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने सरकारी खरीद के लिए धान में स्वीकार्य नमी की मौजूदा 17% सीमा में भी छूट देने की अपील की है।

धान उत्पादक किसानों के सामने 3 बड़े संकट

खेतों में गिरी पकी फसल में अंकुरण का खतरा: तेज हवाओं से जो धान जमीन पर बिछ गया है और पानी में डूब गया है, उसमें बालियों से दाने झड़ने और दानों में अंकुरण (Sprouting) फूटने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे गुणवत्ता काली पड़ जाएगी।

मंडियों में तिरपाल का अभाव और भीगा अनाज: किसानों का आरोप है कि मार्केट कमेटियों ने बारिश से बचाव के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए थे। खुले में पड़ा धान भीगने से आढ़ती और राइस मिलर्स अब नमी का बहाना बनाकर खरीद से इनकार कर रहे हैं।

17% नमी की सख्त सरकारी शर्त: सरकारी खरीद एजेंसियों के कड़े नियमों के चलते 17% से अधिक नमी होने पर खरीद नहीं होती। बारिश के बाद नमी 20 से 22% पहुंच चुकी है, ऐसे में किसान अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों में फंस गए हैं।

निष्कर्ष: मेहनत से तैयार की गई धान की फसल जब कटाई के मुहाने पर आकर बेमौसम बारिश और आंधी की भेंट चढ़ जाए, तो यह किसान की साल भर की आजीविका पर सीधा वज्रपात है। खेतों में फसल का बिछना और मंडियों में तिरपाल के अभाव में अनाज का भीगना प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करता है।

पंजाब और हरियाणा की राज्य सरकारों को चाहिए कि बिना किसी तकनीकी अड़ंगे के तुरंत विशेष गिरदावरी के आदेश दें, मंडियों से जलभराव निकालें और केंद्र सरकार से समन्वय कर धान खरीद में 17% नमी की शर्त को शिथिल करें, ताकि कुदरत की मार झेल रहे किसानों को मंडियों में और अधिक प्रताड़ित न होना पड़े।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. पंजाब के किन जिलों में बेमौसम बारिश से धान को सबसे अधिक नुकसान हुआ है?

उत्तर: पंजाब के मालवा क्षेत्र के श्री मुक्तसर साहिब (मलोट क्षेत्र में 4,000 एकड़ गिरी फसल), बठिंडा और फाजिल्का (बासमती में 15-20% नुकसान) में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया है।

Q2. हरियाणा की किन मंडियों में खुले में रखा धान भीगा है?

उत्तर: हरियाणा की करनाल, जींद और सिरसा अनाज मंडियों में बारिश से बचाव के इंतजाम न होने के कारण खुले में रखा हजारों क्विंटल धान भीग गया है।

Q3. हरियाणा में धान की सरकारी खरीद पहले से क्यों धीमी चल रही थी?

उत्तर: अनाज में अधिक नमी और अपनी मांगों को लेकर चावल मिल मालिकों (राइस मिलर्स) की हड़ताल के कारण खरीद और उठान पहले से ही बुरी तरह प्रभावित था।

Q4. किसान संगठनों ने सरकार से क्या प्रमुख मांगें की हैं?

उत्तर: किसान संगठनों ने फसलों का तत्काल गिरदावरी सर्वे कराने, जल निकासी का प्रबंध करने, मुआवजा जारी करने और खरीद के लिए 17% नमी की सीमा में छूट देने की मांग की है।

Q5. पकी हुई धान की फसल गिरने से क्या नुकसान होता है?

उत्तर: फसल गिरने और पानी में डूबने से दानों में बदरंगपन आ जाता है, दाने अंकुरित होने लगते हैं और कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई की लागत काफी बढ़ जाती है।

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