राजस्थान में ₹14.50 करोड़ के कैंचा बीज वितरण पर सवाल: सप्लाई से पहले बुवाई, टेंडर नियमों में बदलाव की जांच

राजस्थान में किसानों को दिए जाने वाले निशुल्क बीज वितरण अभियान से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की खोजी जांच रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान राज्य बीज निगम द्वारा खरीदे गए करीब ₹14.50 करोड़ के कैंचा बीज की खरीद प्रक्रिया, टेंडर की बदली हुई शर्तों और वितरण रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

आरोप है कि टेंडर की गुणवत्ता और अमानत राशि से जुड़ी सख्त शर्तें हटाई गईं और एकल फर्म से करोड़ों का बीज खरीदा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डीडवाना-कुचामन में बीज पहुंचने की आधिकारिक तारीख से पहले ही कागजों में बुवाई का विवरण दर्ज हो गया। जानिए इस पूरे मामले की परतें और अधिकारियों का पक्ष।

14.50 करोड़ का कैंचा बीज और टेंडर विवाद

किसानों को निशुल्क बीज बांटने की योजना में राजस्थान से ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी खरीद और बीज वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दैनिक भास्कर की भास्कर इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान बीज निगम ने करीब 14.50 करोड़ रुपये का कैंचा बीज खरीदा और किसानों को वितरित किया। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इस खरीद के लिए टेंडर की कुछ शर्तों में बदलाव किया गया और बाद में पुराने नियम फिर लागू कर दिए गए।

एकल फर्म से खरीद और शर्तों में बदलाव

रिपोर्ट के मुताबिक, बीज निगम ने 3 मई 2025 को 30 हजार क्विंटल कैंचा बीज खरीदने के लिए टेंडर जारी किया था। 6 मई को टेंडर की तीन शर्तों में बदलाव किया गया। इनमें बीज उत्पादक किसानों की सूची और भुगतान से जुड़ी ब्रीडर सर्टिफिकेट जैसी शर्तें हटा दी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, बदली हुई शर्तों के बाद टेंडर में सिर्फ आंध्र प्रदेश की चक्रा सीड्स ने हिस्सा लिया। एकल फर्म के टेंडर को रद्द करने के बजाय निगम ने 14.50 करोड़ रुपये में 10 हजार क्विंटल बीज खरीद लिया।

गुणवत्ता जांच और भुगतान नियमों में छूट

यहां सबसे बड़ा सवाल टेंडर की प्रक्रिया को लेकर उठाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बीज की गुणवत्ता और स्रोत को ट्रैक करने वाली कुछ पुरानी शर्तों में छूट दी गई थी। पहले बीज के मॉर्फोलॉजिकल गुणों की सूची और बीज उत्पादक किसानों के लॉट नंबर जैसी जानकारी जरूरी थी। संशोधित शर्तों में इसमें बदलाव किया गया और बीज के स्रोत तथा आनुवंशिक शुद्धता की गारंटी के लिए 500 रुपये के स्टांप पर घोषणा की व्यवस्था रखी गई।

भुगतान की शर्तों में भी बदलाव का उल्लेख रिपोर्ट में है। पुरानी व्यवस्था के तहत 80 फीसदी भुगतान के लिए ओरिजिनल बिल, सीड टेस्टिंग रिपोर्ट, ब्रीडर सर्टिफिकेट और बीज उत्पादकों की सूची जैसी जानकारी जरूरी थी। संशोधित शर्तों में 80 फीसदी भुगतान के लिए ओरिजिनल बिल और सीड टेस्ट रिपोर्ट को पर्याप्त माना गया।

टेंडर की अमानत राशि से जुड़ी शर्त में भी बदलाव किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, पहले 30 हजार क्विंटल की कुल मात्रा के आधार पर 2 फीसदी यानी करीब 75 लाख रुपये की राशि जमा करनी थी। बाद में इसे बोलीदाता द्वारा ऑफर की गई मात्रा की कीमत के 2 फीसदी से जोड़ दिया गया।

बीज सप्लाई 30 जुलाई को, बुवाई 15 जुलाई को कैसे?

रिपोर्ट में एक और गंभीर सवाल बीज की सप्लाई और रिकॉर्ड में दर्ज बुवाई की तारीख को लेकर उठाया गया है। डीडवाना-कुचामन के लिए 30 जुलाई 2025 को 263 क्विंटल कैंचा बीज भेजे जाने का उल्लेख है, जबकि रिकॉर्ड में इससे पहले 15 से 21 जुलाई के बीच ही बीज के वितरण और बुवाई का विवरण दर्ज होने की बात कही गई है।

यानी बीज पहुंचने की तारीख और रिकॉर्ड में दिखाई गई बुवाई की तारीख के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ जगहों पर सप्लाई से पहले ही बुवाई दिखाई गई और सप्लाई के करीब एक महीने बाद बिल बनाए गए।

बीज निगम के अधिकारियों का क्या कहना है?

मामले पर राजस्थान बीज निगम के एमडी गौरव चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने अभी ज्वाइन किया है और इस विषय में जानकारी नहीं दे सकते। उन्होंने तथ्य भेजने की बात कहते हुए जांच करवाने की बात कही। वहीं तत्कालीन विपणन प्रबंधक मुकेश शर्मा ने कहा कि यह बजट घोषणा से जुड़ा मामला था और कोई फर्म आगे नहीं आ रही थी।

इसलिए नियमानुसार कुछ छूट दी गई थी। उनके अनुसार, ये निर्णय कमेटी स्तर पर लिया गया था। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, चक्रा सीड्स का पक्ष जानने के लिए दो बार ईमेल किया गया, लेकिन कंपनी की ओर से जवाब नहीं दिया गया।

किसानों के नाम पर योजनाओं में पारदर्शिता जरूरी

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि किसानों के नाम पर चलने वाली किसी भी सरकारी योजना में बीज की गुणवत्ता, स्रोत, खरीद प्रक्रिया और वितरण रिकॉर्ड की पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है। अगर किसी योजना में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो किसान के हित में यह स्पष्ट होना चाहिए कि बीज कहां से खरीदा गया, किन नियमों के तहत खरीदा गया, किसे दिया गया और रिकॉर्ड में दर्ज वितरण वास्तव में कब हुआ।

फिलहाल सामने आई जानकारी एक मीडिया जांच रिपोर्ट और संबंधित लोगों के बयानों पर आधारित है। इसलिए इन आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य मानने के बजाय जांच और आधिकारिक कार्रवाई के परिणाम का इंतजार करना जरूरी है।

किसानों के लिए सवाल सिर्फ बीज मिलने का नहीं है। सवाल यह भी है कि सरकारी योजना का पैसा और सुविधा वास्तव में किसान तक पारदर्शी तरीके से पहुंच रही है या नहीं। आपके जिले में भी कभी निशुल्क बीज या सरकारी कृषि योजना के वितरण में ऐसी परेशानी सामने आई है? अपना अनुभव कमेंट में जरूर बताएं।

अस्वीकरण: यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट Anil Kumar Prasad द्वारा आधिकारिक आंकड़ों, विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों और जमीनी कृषि वास्तविकताओं के निष्पक्ष अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य नीतिगत निर्णयों और बाजार की स्थिति से किसानों को अवगत कराना है। इस विषय पर अपने क्षेत्र की स्थिति और विचार हमारे WhatsApp पर जरूर साझा करें।

निष्कर्ष: किसानों के कल्याण और हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए चलाई जाने वाली निशुल्क बीज वितरण योजनाएं तभी सार्थक हो सकती हैं जब खरीद से लेकर खेत तक बीज पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो।

₹14.50 करोड़ की इस कैंचा बीज खरीद में टेंडर की शर्तों में ढील और माल पहुंचने से पहले ही कागजों में बुवाई दर्ज होने जैसी विसंगतियां निश्चित तौर पर निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग करती हैं। किसान को सही समय पर उच्च गुणवत्ता का प्रामाणिक बीज मिले और सरकारी बजट का एक-एक पैसा ईमानदारी से खर्च हो, यही कृषि व्यवस्था का पहला सिद्धांत होना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. राजस्थान में कैंचा बीज खरीद का यह पूरा मामला क्या है?

उत्तर: दैनिक भास्कर की जांच रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान बीज निगम द्वारा करीब ₹14.50 करोड़ में 10 हजार क्विंटल कैंचा बीज की खरीद में टेंडर शर्तों में कथित बदलाव और सप्लाई से पहले ही वितरण दर्ज करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

Q2. टेंडर की किन मुख्य शर्तों में बदलाव किया गया था?

उत्तर: रिपोर्ट के मुताबिक ब्रीडर सर्टिफिकेट, बीज उत्पादक किसानों की सूची, ₹75 लाख की निश्चित अमानत राशि और भुगतान की सख्त शर्तों में छूट देकर ₹500 के स्टांप पर घोषणा की व्यवस्था की गई थी।

Q3. डीडवाना-कुचामन जिले में सप्लाई और बुवाई को लेकर क्या विसंगति सामने आई?

उत्तर: रिकॉर्ड के अनुसार जिले में 263 क्विंटल कैंचा बीज 30 जुलाई 2025 को पहुंचा, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में 15 से 21 जुलाई के बीच ही किसानों को वितरण और बुवाई का विवरण दर्ज कर दिया गया था।

Q4. मामले पर राजस्थान बीज निगम के अधिकारियों का क्या कहना है?

उत्तर: निगम के एमडी गौरव चतुर्वेदी ने नए कार्यभार का हवाला देकर तथ्य जांचने की बात कही, जबकि तत्कालीन विपणन प्रबंधक मुकेश शर्मा के अनुसार यह निर्णय बजट घोषणा के तहत कमेटी स्तर पर नियमानुसार लिया गया था।

Q5. क्या इस मामले में लगाए गए आरोप सिद्ध हो चुके हैं?

उत्तर: नहीं, सामने आई जानकारी मीडिया जांच रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के बयानों पर आधारित है; इस पर अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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