राजस्थान में एम-पैक्स को खाद-बीज के लिए मिलेगी साख सीमा: सहकारी बैंकों से 60 से 75% तक ऋण

राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में रबी बुवाई के समय खाद, उर्वरक, प्रमाणित बीज और कीटनाशकों की किल्लत को हमेशा के लिए समाप्त करने की दिशा में सहकारिता विभाग ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। विभाग के नए दिशा-निर्देशों के तहत अब बहुद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋणदात्री सहकारी समितियों यानी एम-पैक्स (MPACS) को इन कृषि आदानों के थोक कारोबार के लिए जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से नकद साख सीमा (क्रेडिट लिमिट) उपलब्ध कराई जाएगी।

दृष्टिबंधक व्यवस्था में स्टॉक मूल्य का 60% और ताला-कुंजी व्यवस्था में 75% तक ऋण स्वीकृत किया जाएगा। जानिए एनडीआर (NDR) के नियम, पक्के गोदाम की शर्तें और किसानों पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव।

एम-पैक्स के लिए साख सीमा का फैसला

राजस्थान में किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सहकारिता विभाग के नए दिशा-निर्देशों के तहत अब बहुद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋणदात्री सहकारी समितियों यानी एम-पैक्स (MPACS) को खाद, उर्वरक, बीज और कीटनाशकों के कारोबार के लिए साख सीमा उपलब्ध कराई जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत करना और किसानों को खेती के जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध कराना है। इसके तहत केंद्रीय सहकारी बैंक स्टॉक के आधार पर समितियों को ऋण सुविधा देंगे।

दृष्टिबंधक और ताला-कुंजी में 60 से 75% ऋण

नई व्यवस्था में दृष्टिबंधक साख सीमा के तहत समिति के कुल स्टॉक मूल्य का अधिकतम 60 प्रतिशत तक ऋण स्वीकृत किया जा सकेगा। वहीं, ताला-कुंजी साख सीमा के मामले में स्टॉक मूल्य का अधिकतम 75 प्रतिशत तक ऋण मिल सकेगा। शेष राशि का इंतजाम समितियों को अपने संसाधनों से करना होगा।

एनडीआर और वित्तीय पात्रता के कड़े नियम

साख सीमा तय करने के लिए समितियों की वित्तीय स्थिति, शुद्ध प्रयोज्य वित्तीय साधनों और एनडीआर को आधार बनाया जाएगा। एनडीआर के आधार पर दृष्टिबंधक सीमा डेढ़ गुना और ताला-कुंजी सीमा ढाई गुना तक निर्धारित की जा सकेगी। जिन समितियों का एनडीआर शून्य या उससे कम होगा, उन्हें सामान्यतः नकद साख सीमा नहीं मिलेगी। विशेष मामलों में निर्धारित अधिकारियों की संस्तुति के बाद ही अनुमति दी जा सकेगी।

पक्के गोदाम और प्रशिक्षित व्यवस्थापक की शर्त

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए समितियों के पास प्रशिक्षित पूर्णकालिक व्यवस्थापक, स्वयं का या किराए का कार्यालय और गोदाम जैसी जरूरी सुविधाएं होनी चाहिए। गोदाम सुरक्षित, पक्के और नमी तथा चोरी से बचाव के उचित इंतजाम वाले होने चाहिए। समितियों को बैंक के समक्ष नियमित वित्तीय विवरण और स्टॉक की जानकारी भी प्रस्तुत करनी होगी।

ग्रामीण किसानों को निजी निर्भरता से मुक्ति

इस फैसले से सहकारी समितियों को खाद और बीज का पर्याप्त स्टॉक रखने में मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को बुवाई के समय कृषि आदानों की उपलब्धता बेहतर बनाने और निजी विक्रेताओं पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।

इस नई व्यवस्था से किसानों को मिलने वाले 3 बड़े लाभ

बुवाई के समय खाद की किल्लत खत्म: पहले पूंजी के अभाव में पैक्स समितियां अग्रिम खाद नहीं मंगा पाती थीं। अब बैंक से 60 से 75% तक तुरंत लोन मिलने से समितियां पहले से डीएपी और यूरिया का बंपर स्टॉक रखेंगी।

निजी दुकानों और कालाबाजारी से मुक्ति: जब गांव की अपनी सरकारी सोसाइटी में पर्याप्त खाद और प्रमाणित बीज सरकारी दर पर मिलेंगे, तो किसानों को मजबूरन महंगे निजी विक्रेताओं के पास नहीं जाना पड़ेगा।

एक ही छत के नीचे सभी कृषि आदान: एम-पैक्स अब केवल ऋण बांटने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उर्वरक, कीटनाशक और बीज का पूरा केंद्र बनेंगी, जिससे किसानों का समय और किराया दोनों बचेगा।

निष्कर्ष: राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में किसानों की आर्थिक खुशहाली काफी हद तक सहकारी साख तंत्र पर निर्भर करती है। सहकारिता विभाग द्वारा एम-पैक्स को सीधे 60 से 75 प्रतिशत तक स्टॉक आधारित ऋण सुविधा देना एक दूरदर्शी और व्यावहारिक नीतिगत कदम है। इससे न केवल आर्थिक तंगी से जूझ रही ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कारोबार में नई जान आएगी।

बल्कि रबी और खरीफ के पीक सीजन में किसानों को खाद-बीज के लिए लगने वाली लंबी लाइनों और निजी दुकानों की मनमानी से भी स्थायी मुक्ति मिलेगी। अब जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और प्रबंधकों की यह जिम्मेदारी है कि वे समय रहते कागजी औपचारिकताएं पूरी कर सोसायटियों के गोदामों में पर्याप्त खाद-बीज पहुंचाएं।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह रिपोर्ट Anil Kumar Prasad द्वारा राजस्थान सहकारिता विभाग के आधिकारिक दिशा-निर्देशों और सहकारी ऋण नियमों के आधार पर तैयार की गई है। अपनी स्थानीय ग्राम सेवा सहकारी समिति में खाद-बीज उपलब्धता और स्टॉक की जानकारी के लिए स्थानीय व्यवस्थापक या संबंधित केंद्रीय सहकारी बैंक शाखा से संपर्क करें। क्या आपके क्षेत्र की सहकारी समिति में खाद-बीज आसानी से मिल रहा है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने जिले और गांव का नाम जरूर साझा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. राजस्थान सहकारिता विभाग ने एम-पैक्स (MPACS) के लिए क्या नया फैसला लिया है?

उत्तर: विभाग ने बहुद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋणदात्री सहकारी समितियों को खाद, बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के कारोबार के लिए जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों से साख सीमा (क्रेडिट लिमिट) उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

Q2. दृष्टिबंधक और ताला-कुंजी व्यवस्था में कितना ऋण मिल सकता है?

उत्तर: दृष्टिबंधक साख सीमा में कुल स्टॉक मूल्य का अधिकतम 60 प्रतिशत और ताला-कुंजी साख सीमा में स्टॉक मूल्य का अधिकतम 75 प्रतिशत तक बैंक ऋण मिल सकेगा।

Q3. साख सीमा तय करने के लिए किस वित्तीय मानक को आधार बनाया गया है?

उत्तर: समिति की वित्तीय स्थिति, शुद्ध प्रयोज्य वित्तीय साधनों और एनडीआर (NDR) को आधार बनाया गया है, जिसके तहत एनडीआर का क्रमशः डेढ़ गुना और ढाई गुना तक ऋण दिया जा सकेगा।

Q4. किन समितियों को इस ऋण सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा?

उत्तर: जिन समितियों का एनडीआर शून्य या उससे कम (ऋणात्मक) होगा, उन्हें सामान्यतः यह साख सीमा नहीं मिलेगी; केवल विशेष मामलों में उच्चाधिकारियों की संस्तुति पर विचार होगा।

Q5. ऋण प्राप्त करने के लिए समितियों के पास कौन-से बुनियादी ढांचे होने चाहिए?

उत्तर: समिति के पास प्रशिक्षित पूर्णकालिक व्यवस्थापक, स्वयं का या किराए का कार्यालय, और नमी व चोरी से सुरक्षित पक्का गोदाम होना अनिवार्य है।

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