हरियाणा में रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के तहत गेहूं की खरीद अब अपने पूरे शबाब पर है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंडियों की व्यवस्था को सुचारु बताया है। हालांकि, रिकॉर्ड आवक और डिजिटल सिस्टम की जटिलताओं ने प्रशासन के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। मंडियों में गेहूं की भारी आवक लगातार जारी है।
12 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की मंडियों में अब तक 39.65 लाख टन गेहूं पहुंच चुका है। इस विशाल आवक को संभालने के लिए सरकार ने बायोमेट्रिक सत्यापन का सहारा लिया है। इस प्रणाली के जरिए अब तक लगभग 2.44 लाख किसानों का डेटा वेरिफाई किया जा चुका है। यह सत्यापन कुल 30.90 लाख टन उपज को कवर करता है।
इस पूरी खरीद प्रक्रिया की सबसे बड़ी मजबूती इसका डिजिटल भुगतान तंत्र बनकर उभरा है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने इस बार तीन-स्तरीय फसल सत्यापन प्रणाली को भी सख्ती से लागू किया है। इस त्रिस्तरीय प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि मंडियों में केवल वास्तविक उपज की ही खरीद सुनिश्चित हो सके।
हालांकि, एक ओर जहां डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी है, वहीं तकनीकी गड़बड़ियों ने परेशानी भी बढ़ाई है। ‘ऑनलाइन गेट-पास’ जनरेट करने में आ रही दिक्कतों और सर्वर की कमियों ने मंडियों का माहौल काफी गरमा दिया है। यमुनानगर की जगाधरी मंडी जैसे कई खरीद केंद्रों पर सर्वर डाउन होने की शिकायतें मिली हैं।
गेट-पास न मिलने के कारण इन मंडियों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मीलों लंबी कतारें देखी गईं, जिससे किसानों को भारी परेशानी हुई। इस स्थिति ने न केवल किसानों का इंतजार बढ़ाया है, बल्कि किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शनों को भी जन्म दिया है। भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने इस अव्यवस्था पर अपना स्पष्ट रुख रखा है और सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
किसान नेताओं का कहना है कि बिना मजबूत बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर के डिजिटलीकरण करना किसानों के लिए भारी परेशानी का सबब बन रहा है। सरकार के लिए आगामी दिनों में इस व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
प्रशासन को पीक सीजन के दौरान तकनीकी सुधारों को तेजी से लागू करना होगा। इसका एकमात्र लक्ष्य यही है कि किसानों को अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए कतारों में न खड़ा होना पड़े और खरीद सुगमता से हो सके।
यह भी पढ़े: ओडिशा ने धान खरीद में रचा इतिहास; किसानों से खरीदा गया 77.78 लाख टन धान
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।
