यह तस्वीर किसी एक खेत की नहीं बल्कि हजारों किसानों की उस पीड़ा को दिखाती है जो हर साल फसल पकने के समय देखने को मिलती है। कई बार खेतों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं और कुछ ही मिनटों में महीनों की मेहनत राख बन जाती है। जब खेत में खड़ी गेहूं या अन्य फसल जल जाती है तो किसान के सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है।
अक्सर देखा जाता है कि खेतों के ऊपर से गुजरने वाली बिजली की लाइन या ट्रांसफार्मर में स्पार्किंग होने से आग लग जाती है। यदि तार ढीले हों, लाइनें पुरानी हों या रखरखाव सही तरीके से न किया गया हो तो तेज हवा के समय चिंगारी निकलने का खतरा बढ़ जाता है। सूखी फसल और पराली के कारण यह आग तेजी से फैलती है और कुछ ही समय में पूरा खेत जल सकता है।
ऐसी घटनाओं में किसान को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। जिस फसल को तैयार करने में महीनों की मेहनत, पानी, खाद और मजदूरी लगती है, वह अचानक आग में जलकर खत्म हो जाती है। कई बार किसान के पास इतना साधन भी नहीं होता कि वह तुरंत आग पर काबू पा सके। किसानों का कहना है कि जब पराली जलाने की बात आती है तो कई जगह उपग्रह निगरानी से तुरंत कार्रवाई की जाती है, लेकिन जब खेत में खड़ी फसल किसी तकनीकी खराबी या लापरवाही से जल जाती है तो उस पर उतनी तेजी से ध्यान नहीं दिया जाता।
यही कारण है कि किसान चाहते हैं कि ऐसी घटनाओं की सही जांच हो और यदि किसी विभाग की लापरवाही से आग लगी है तो उस पर उचित कार्रवाई भी होनी चाहिए। किसान के लिए यह भी जरूरी है कि वे अपने खेतों में कुछ सावधानियां जरूर रखें। खेत के आसपास सूखी घास और कचरा कम रखें ताकि आग तेजी से न फैले। यदि खेत के पास बिजली की लाइन या ट्रांसफार्मर है तो समय-समय पर उसकी स्थिति पर ध्यान दें और कोई समस्या दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।
साथ ही खेत के पास पानी या अन्य साधन की व्यवस्था भी रखने की कोशिश करें ताकि जरूरत पड़ने पर आग पर जल्दी काबू पाया जा सके।किसानों के लिए खेती सिर्फ एक काम नहीं बल्कि किसान के जीवन का आधार है। इसलिए फसल की सुरक्षा के लिए जागरूक रहना बहुत जरूरी है। यदि इस तरह की कोई घटना आपके क्षेत्र में भी हुई है तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को जरूर दें ताकि आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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