सीहोर में खराब सोयाबीन लेकर तहसील पहुंचे किसान, सूखा घोषित करने और MSP गारंटी समेत 17 सूत्रीय मांगें

खेती बचेगी, तभी किसान बचेगा और किसान बचेगा, तभी देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत रहेगी। सीहोर के भैरूंदा क्षेत्र में किसानों ने खराब सोयाबीन की फसल हाथों में लेकर तहसील तक पहुंचकर अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। किसानों ने मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम एसडीएम को 17 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर सिर्फ राहत नहीं, बल्कि खेती से जुड़ी कई मूलभूत समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग उठाई है।

अल्पवर्षा और कीट प्रकोप से सोयाबीन बर्बाद

कम बारिश और कीट प्रकोप से सोयाबीन, उड़द, धान और मक्का जैसी फसलों पर असर पड़ने की बात किसानों ने रखी। ऐसे में प्रभावित गांवों में जल्द सर्वे होना जरूरी है, ताकि वास्तविक नुकसान सामने आए और पात्र किसानों को मुआवजा तथा फसल बीमा का लाभ समय पर मिल सके। किसानों की मांग है कि सीहोर जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने पर भी सरकार गंभीरता से विचार करे।

मक्का-सोयाबीन की एमएसपी पर खरीद

सबसे बड़ा मुद्दा फसल के उचित दाम का है। किसानों ने मक्का का पंजीयन शुरू कर एमएसपी पर खरीदी सुनिश्चित करने के साथ सोयाबीन और धान की भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की मांग की है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में एमएसपी गारंटी कानून लागू करने की मांग भी उठाई गई है। यह मांग सीधे किसान की आय और उसकी मेहनत के मूल्य से जुड़ी है।

डीएपी-यूरिया की उपलब्धता

किसानों ने खाद की उपलब्धता को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है। डीएपी, यूरिया, टीएसपी समेत सभी जरूरी उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि किसान को बुवाई और फसल प्रबंधन के समय खाद के लिए परेशान न होना पड़े।

दिन में बिजली और खेतों से मोटर-सोलर चोरी पर रोक

बिजली व्यवस्था को लेकर किसानों ने दिन में पर्याप्त बिजली और रात में छह घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मांग रखी। बिजली के तार, पोल और ट्रांसफार्मरों के रखरखाव के साथ खेतों से मोटर, केबल, स्टार्टर और सोलर प्लेट की चोरी रोकने तथा शिकायतों पर एफआईआर दर्ज कर प्रभावी कार्रवाई की मांग भी की गई।

नर्मदा उद्वहन सिंचाई परियोजना में तेजी और कोलार डैम से मूंग हेतु पानी की मांग

सिंचाई किसानों की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। नर्मदा उद्वहन सिंचाई परियोजना के निर्माण में देरी की जांच और काम में तेजी लाने की मांग के साथ किसानों ने तवा डैम की तर्ज पर कोलार डैम का पानी मूंग की फसल के लिए उपलब्ध कराने की मांग की है।

आवंलीघाट से कोलार डैम के झोलियापुर क्षेत्र तक पाइपलाइन की योजना स्वीकृत करने की मांग भी महत्वपूर्ण है। किसानों ने सड़क, स्टॉप डेम, मंडी निर्माण और कृषि व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं। भैरूंदा-संदलपुर मार्ग की मरम्मत और डामरीकरण, स्टॉप डेमों में जरूरी गेट लगाने तथा कृषि उपज मंडी के निर्माण में तेजी के साथ उसकी गुणवत्ता की जांच की मांग की गई है।

नकली कीटनाशकों पर कार्रवाई, मंडी जांच और लंबित कुसुम-तारबंदी फंड की मांग

नकली कीटनाशकों के मामले में भी किसानों ने स्पष्ट जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं मंडी में किसानों के नाम पर मूंग की फसल बेचे जाने के कथित आरोपों की जांच कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी है, क्योंकि किसान की उपज और उसके नाम का गलत इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

पिछले वर्ष की सोयाबीन फसल की बीमा राशि से वंचित गांवों की जांच कर भुगतान, मुख्यमंत्री खेत तारबंदी योजना और कुसुम योजना के लंबित फंड जारी करने तथा किसानों को कर्जमुक्त करने जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं।

किसान-सरकार समन्वय समिति और 17 मांगों का स्थायी समाधान

सबसे महत्वपूर्ण सुझावों में प्रदेश और जिला स्तर पर किसान-सरकार समन्वय समिति बनाने की मांग है। अगर ऐसी व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम करती है, तो किसान की समस्या आंदोलन तक पहुंचने से पहले ही प्रशासन के सामने आ सकती है।

किसानों का प्रदर्शन केवल विरोध नहीं, बल्कि खेती से जुड़ी समस्याओं का समाधान मांगने की आवाज है। अब जरूरत है कि ज्ञापन सिर्फ कागज तक सीमित न रहे। जिन मांगों पर कार्रवाई संभव है, उन पर समयबद्ध निर्णय हो और जिन मामलों में सर्वे या जांच जरूरी है, उसकी स्पष्ट जानकारी किसानों को दी जाए।

किसान आखिर यही चाहता है- फसल खराब हो तो समय पर राहत मिले, फसल पैदा हो तो उचित दाम मिले, खाद-बिजली-पानी समय पर मिले और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना परेशानी मिले। सवाल यही है कि क्या इन 17 मांगों पर सरकार और प्रशासन अब जमीन पर ठोस कार्रवाई करेगा?

अस्वीकरण (Disclaimer): यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट Anil Kumar Prasad द्वारा आधिकारिक आंकड़ों, विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों और जमीनी कृषि वास्तविकताओं के निष्पक्ष अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य नीतिगत निर्णयों और बाजार की स्थिति से किसानों को अवगत कराना है। इस विषय पर अपने क्षेत्र की स्थिति और विचार हमारे WhatsApp पर जरूर साझा करें।

निष्कर्ष: सीहोर के भैरूंदा में किसानों का अपनी बर्बाद सोयाबीन फसल लेकर तहसील तक पहुंचना महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश के अन्नदाता की बुनियादी आर्थिक सुरक्षा की गुहार है। जब तक सूखा सर्वे, खाद-बिजली की सुचारु आपूर्ति और नर्मदा उद्वहन जैसी सिंचाई योजनाओं पर समयबद्ध प्रशासनिक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संकट से नहीं उबारा जा सकता।

सरकार को चाहिए कि इस 17 सूत्रीय ज्ञापन को केवल औपचारिक कागज न मानकर तुरंत संयुक्त सर्वे टीमें खेतों में भेजे, एमएसपी खरीद की व्यवस्था पुख्ता करे और किसान-सरकार समन्वय समिति गठित कर समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले, क्योंकि खेती सुरक्षित रहेगी तभी देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. सीहोर के भैरूंदा में किसानों ने प्रदर्शन और ज्ञापन क्यों सौंपा?

उत्तर: कम बारिश और कीटों से सोयाबीन, मक्का और उड़द की फसलें बर्बाद होने के बाद राहत, सर्वे, एमएसपी खरीद और बुनियादी सुविधाओं के समाधान हेतु किसानों ने 17 सूत्रीय ज्ञापन दिया।

Q2. किसानों की मुख्य आर्थिक मांग क्या है?

उत्तर: जिले को सूखाग्रस्त घोषित करना, तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराकर बीमा देना, और मध्य प्रदेश में एमएसपी गारंटी कानून लागू कर मक्का व सोयाबीन की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करना।

Q3. सिंचाई को लेकर किसानों ने किन परियोजनाओं पर मांग उठाई है?

उत्तर: नर्मदा उद्वहन सिंचाई परियोजना के निर्माण में तेजी लाने, कोलार डैम से मूंग हेतु पानी देने और आवंलीघाट से झोलियापुर तक पाइपलाइन स्वीकृत करने की मांग की गई है।

Q4. बिजली और सुरक्षा को लेकर किसानों की क्या शिकायतें हैं?

उत्तर: किसानों ने दिन में पर्याप्त और रात में 6 घंटे बिजली देने, ट्रांसफार्मर सुधारने तथा खेतों से मोटर, केबल और सोलर प्लेट चोरी पर सख्त एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

Q5. किसान-सरकार समन्वय समिति बनाने का क्या उद्देश्य है?

उत्तर: जिला और राज्य स्तर पर ऐसी समिति होने से किसानों की समस्याएं आंदोलन का रूप लेने से पहले ही बातचीत के जरिए प्रशासनिक स्तर पर सुलझाई जा सकेंगी।

यह भी पढ़े: बाराबंकी में धान किसानों ने MSP पर ₹200 बोनस और हाइब्रिड धान की 100% खरीद की मांग उठाई

जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।