हर साल खेती शुरू होने से पहले किसान अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, खाद और कीटनाशक खरीदता है। वह उम्मीद करता है कि जिस उत्पाद पर वह अपनी मेहनत की कमाई खर्च कर रहा है, वह उसकी फसल को सुरक्षित रखेगा और उत्पादन बढ़ाएगा। लेकिन जब बाजार में नकली या अमानक कृषि आदानों की बिक्री होती है, तब सबसे बड़ा नुकसान किसान को उठाना पड़ता है।
कई बार फसल खराब होने के बाद किसान यह समझ ही नहीं पाता कि गलती मौसम की थी, दवा की थी या फिर उसे जो उत्पाद बेचा गया वह असली था ही नहीं।
शाहजहांपुर में कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई: 15 दुकानों पर छापेमारी
इसी समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में कृषि विभाग ने नकली और अमानक कीटनाशकों की बिक्री रोकने के लिए विशेष जांच अभियान चलाया। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित संयुक्त टीमों ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कीटनाशी विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की। इस अभियान के दौरान कुल 15 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और 9 कीटनाशी नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए। इन नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां उनकी गुणवत्ता की जांच की जाएगी।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यदि जांच रिपोर्ट में किसी भी नमूने में गुणवत्ता संबंधी कमी, मिलावट या मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि बाजार में गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि किसानों को सही उत्पाद मिल सके।
निरीक्षण के दौरान केवल नमूने ही नहीं लिए गए बल्कि दुकानों के लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की गई। कई स्थानों पर रिकॉर्ड में अनियमितताएं मिलने पर चार दुकानदारों को चेतावनी जारी की गई। वहीं निरीक्षण के समय दो प्रतिष्ठान बंद मिलने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
नकली कीटनाशकों से किसानों को होने वाला बड़ा नुकसान
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नकली कीटनाशकों का असर केवल उत्पादन पर ही नहीं पड़ता बल्कि किसान की पूरी लागत पर भी पड़ता है। किसान महंगी दवा खरीदता है, समय पर उसका छिड़काव करता है, लेकिन यदि दवा नकली निकल जाए तो कीट नियंत्रण नहीं होता। इसके बाद किसान दोबारा दवा खरीदने को मजबूर होता है, जिससे लागत बढ़ जाती है और कई बार फसल को बचाना भी मुश्किल हो जाता है।
आज बाजार में ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहां असली कंपनी के नाम और पैकिंग की नकल करके नकली उत्पाद बेचे जाते हैं। देखने में बोतल बिल्कुल असली जैसी लगती है, लेकिन उसके अंदर मौजूद रसायन या तो मानक के अनुरूप नहीं होते या बिल्कुल अलग होते हैं। ऐसे उत्पाद न केवल कीट नियंत्रण में विफल रहते हैं बल्कि फसल को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
नकली कीटनाशक (Pesticides) खरीदने से कैसे बचें?
इसीलिए कृषि विभाग लगातार किसानों से अपील करता है कि वे हमेशा लाइसेंसधारी दुकानों से ही कृषि आदान खरीदें। बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं या सड़क किनारे अस्थायी दुकानों से दवा खरीदने से बचें। कई बार कुछ रुपये सस्ता मिलने के लालच में किसान ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं, जिसका नुकसान बाद में हजारों रुपये तक पहुंच जाता है।
हमेशा लाइसेंसधारी दुकान से पक्का बिल लें
दवा खरीदते समय हमेशा पक्का बिल लेना चाहिए। बिल केवल खरीद का प्रमाण नहीं होता बल्कि भविष्य में किसी शिकायत या जांच की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी होता है। यदि किसी दवा की गुणवत्ता खराब निकलती है तो बिना बिल के किसान के लिए शिकायत दर्ज कराना और कार्रवाई कराना बेहद कठिन हो जाता है।
बैच नंबर, सील और एक्सपायरी डेट की जांच करें
किसानों को खरीद के समय उत्पाद की पैकिंग, बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और निर्माता कंपनी का नाम भी अवश्य जांचना चाहिए। यदि पैकिंग पर किसी प्रकार की छेड़छाड़ दिखाई दे, लेबल अस्पष्ट हो या सील टूटी हुई हो तो ऐसे उत्पाद को बिल्कुल न खरीदें।
खाद या दवा नकली होने का संदेह होने पर कहाँ शिकायत करें?
यदि किसी दवा के प्रयोग के बाद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते या संदेह होता है कि उत्पाद नकली है, तो इसकी सूचना तुरंत कृषि विभाग या जिला कृषि अधिकारी को दें। समय पर शिकायत मिलने पर विभाग नमूना लेकर जांच करा सकता है और दोषी पाए जाने पर संबंधित विक्रेता या कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि नकली कृषि आदानों पर रोक केवल सरकारी कार्रवाई से संभव नहीं है। इसमें किसानों की जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। यदि किसान बिना बिल खरीदी करना बंद कर दें, संदिग्ध दुकानों की सूचना दें और केवल प्रमाणित विक्रेताओं से खरीदारी करें तो नकली उत्पादों का कारोबार काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सरकार और कृषि विभाग समय-समय पर इस प्रकार के निरीक्षण अभियान चलाते रहते हैं, लेकिन इन अभियानों का वास्तविक उद्देश्य किसानों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना है। यदि बाजार में केवल मानक उत्पाद उपलब्ध होंगे तो किसानों की लागत सुरक्षित रहेगी, उत्पादन बढ़ेगा और कृषि पर उनका विश्वास भी मजबूत होगा।
खेती में सफलता केवल अच्छी किस्म के बीज या समय पर सिंचाई से ही नहीं मिलती, बल्कि सही और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक तथा उर्वरकों का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए खरीदारी करते समय थोड़ी सावधानी भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान से बचा सकती है। यदि यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे अधिक से अधिक किसान भाइयों तक जरूर पहुंचाएं, ताकि हर किसान जागरूक बने और नकली कृषि आदानों के खिलाफ मिलकर आवाज उठाए।
निष्कर्ष: कृषि क्षेत्र में शाहजहांपुर प्रशासन द्वारा चलाया गया यह विशेष जांच अभियान नकली और अमानक कीटनाशकों के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए एक स्वागत योग्य कदम है। हालांकि, सरकारी कार्रवाई के साथ-साथ किसान भाइयों की खुद की जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।
जब तक हमारे किसान साथी पक्के बिल के साथ प्रमाणित दवाएं खरीदना शुरू नहीं करेंगे, तब तक नकली उत्पादों का यह नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो सकता। सजग बनें, सही उत्पाद चुनें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत जिला कृषि अधिकारी को देकर अपनी फसल और गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखें।
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मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
