देश में 2026-27 सीजन के दौरान मूंगफली उत्पादन में सकारात्मक बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी कृषि विभाग की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि का मुख्य कारण किसानों का पारंपरिक कपास की खेती से हटकर तिलहन फसलों की ओर बढ़ता रुझान है। बाज़ार में मूंगफली के बेहतर दाम और इसकी स्थिर मांग को देखते हुए किसान इसे एक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जिससे तिलहन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस बार मूंगफली की बुवाई का रकबा लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 57 लाख हेक्टेयर तक पहुँचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 56.2 लाख हेक्टेयर की तुलना में एक महत्वपूर्ण बढ़त है। रकबे में इस बढ़ोत्तरी के परिणामस्वरूप, कुल उत्पादन 77.5 लाख टन होने की संभावना जताई गई है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 3 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि यह उत्पादन वृद्धि मुख्य रूप से बुवाई क्षेत्र के विस्तार पर टिकी है, जबकि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में तकनीकी सुधार की गुंजाइश अभी भी काफी बनी हुई है।
गुजरात जैसे देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में मूंगफली की पैदावार को स्थिर और बेहतर बनाए रखने के लिए उच्च उत्पादकता वाली किस्मों और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। कपास जैसी फसलों की तुलना में मूंगफली की खेती को कम जोखिम वाला माना जाता है, क्योंकि इसे खाद्य तेल उद्योग के साथ-साथ सीधे उपभोग के लिए भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत मांग प्राप्त होती है। अनुकूल बाज़ार परिस्थितियों और निरंतर होते तकनीकी सुधारों के संगम से भारत वैश्विक मूंगफली बाज़ार में एक अग्रणी उत्पादक के रूप में अपनी मज़बूत पकड़ बनाए रखने की दिशा में अग्रसर है।
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