भारतीय चीनी मिल संघ इस्मा के अनुसार, चालू चीनी सीजन में देश के चीनी उत्पादन में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। 15 जनवरी तक अखिल भारतीय स्तर पर चीनी उत्पादन सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 159.09 लाख टन पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 130.44 लाख टन उत्पादन की तुलना में मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में महाराष्ट्र ने सबसे तेज वृद्धि दर्ज की है। राज्य में चीनी उत्पादन 51 प्रतिशत उछलकर 42.71 लाख टन से बढ़कर 64.50 लाख टन हो गया है, वहीं सक्रिय मिलों की संख्या भी 196 से बढ़कर 204 पहुंच गई है। देश के सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन 8 प्रतिशत की स्थिर बढ़ोतरी के साथ 46.05 लाख टन रहा। कर्नाटक में भी पेराई की रफ्तार बेहतर रही और उत्पादन करीब 13 प्रतिशत बढ़कर 31.05 लाख टन तक पहुंच गया।
इस शानदार ग्रोथ के पीछे महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का बड़ा हाथ है। अनुकूल मौसम और गन्ने की बंपर पैदावार ने मिलों के पहियों को रफ्तार दे दी है। इस बार पेराई सीजन समय पर शुरू होना भी एक बड़ा प्लस पॉइंट रहा।
चीनी के उत्पादन में इस बढ़ोतरी के पीछे पेराई में आई तेजी के साथ-साथ परिचालित मिलों की संख्या में इजाफा भी एक प्रमुख कारण रहा है। इस सीजन अब तक 518 चीनी मिलें परिचालन में हैं, जबकि एक साल पहले इसी समय यह संख्या 500 थी। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस रुझान से घरेलू आपूर्ति मजबूत होगी और आगे के महीनों में बाजार पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
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