सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से किसानों को धीरे-धीरे गेहूं और धान की खेती से दलहन उत्पादन की ओर प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया है और देश की दीर्घकालिक फसल नीति की समीक्षा की जरूरत बताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह मूल्यांकन किया जाना चाहिए कि क्या वर्तमान स्तर पर गेहूं और धान का उत्पादन आवश्यक है।
अदालत ने दलहन फसलों को अधिक प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए फसल विविधीकरण की ठोस रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि किसानों को दलहन की ओर आकर्षित करने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन, लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी और सुनिश्चित बाजार व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।
साथ ही यह भी कहा गया कि आयात नीति, विशेष रूप से पीली मटर जैसी दलहनों के मामले में, ऐसी होनी चाहिए जिससे घरेलू उत्पादन प्रभावित न हो। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह हितधारकों से परामर्श कर दलहन और फसल विविधीकरण से जुड़ी नीतियों की समीक्षा करे और इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
अदालत ने उत्तर भारत में अनाज आधारित खेती के संरचनात्मक संकट की ओर भी ध्यान दिलाया। इसमें भूजल का अत्यधिक दोहन, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव शामिल हैं। पीठ ने कहा कि बढ़ते तापमान का असर गेहूं की पैदावार पर दिखने लगा है, जबकि धान की खेती जल संसाधनों पर भारी दबाव बना रही है।
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