केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में कृषि क्षेत्र के लिए 1,62,671 करोड़ का प्रावधान किया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान 1,51,853 करोड़ से करीब 7 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी स्पष्ट संकेत देती है कि केंद्र सरकार किसान कल्याण, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को नीति के केंद्र में रखे हुए है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के बजट में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में जहां कृषि क्षेत्र का आवंटन करीब 21,933 करोड़ था, वहीं अब यह बढ़कर 1.5 लाख करोड़ से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है। यह वृद्धि कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने की रणनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह बजट प्रावधान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, एमएसपी आधारित खरीद, सिंचाई अवसंरचना, भंडारण और आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ीकरण जैसी प्रमुख योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। साथ ही अनुसंधान, डिजिटल कृषि, जलवायु-सहिष्णु खेती और पशुपालन, डेयरी व मत्स्य जैसे सहायक क्षेत्रों पर भी विशेष फोकस रहेगा, ताकि कृषि को आर्थिक विकास के टिकाऊ इंजन के रूप में स्थापित किया जा सके।
इस साल सरकार का पूरा जोर ‘हाई-वैल्यू’ फसलों पर है। तटीय क्षेत्रों में नारियल, काजू और कोको के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। यही नहीं, चंदन की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसानों की आय में इजाफा हो सके।”
कुल मिलाकर, यह बजट परंपरागत खेती से हटकर तकनीक और विविधता की ओर बढ़ने का संकेत है। आपको क्या लगता है, क्या इन कदमों से किसानों की आय दोगुनी होगी?
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