देश भर की मंडियों में आलू की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बढ़ती आवक के मुकाबले कमजोर मांग के चलते बीते एक महीने में प्रमुख थोक मंडियों में कीमतों में कमजोरी बनी हुई है। कई उत्पादन क्षेत्रों में किसानों को मजबूरी में औने-पौने दामों पर बिक्री करनी पड़ रही है। बाजार सूत्रों के अनुसार, कीमतों पर दबाव की सबसे बड़ी वजह कोल्ड स्टोरेज में अब भी मौजूद पुराना स्टॉक है, वहीं नई फसल की तेज आवक ने स्थिति और कमजोर कर दी है।
अनुकूल मौसम के चलते इस साल रिकॉर्ड या बंपर उत्पादन की उम्मीद भी बाजार धारणा को नरम बनाए हुए है। व्यापारियों का मानना है कि आपूर्ति के इस दोहरे दबाव के कारण मौजूदा महीने में भी नरमी बनी रह सकती है। समस्या की जड़ दो तरफा है। एक तरफ कोल्ड स्टोरेज अभी भी पिछले साल के पुराने आलू से भरे पड़े हैं। व्यापारी और किसान इस उम्मीद में बैठे थे कि अंत में दाम बढ़ेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
दूसरी तरफ, नई फसल मंडियों में दस्तक दे चुकी है। जब बाजार में पुराना स्टॉक खत्म नहीं हुआ और ऊपर से ताज़ा माल भारी मात्रा में आ गया, तो ‘डिमांड और सप्लाई’ का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। नतीजा? जो आलू कुछ महीने पहले अच्छे दामों पर था, आज उसे कोई पूछने वाला नहीं है।” प्रमुख बाजारों में गिरावट साफ दिख रही है।
आगरा में भाव एक महीने पहले के प्रति क्विंटल 900 से 1,250 से गिरकर प्रति क्विंटल 500 से 650 रुपए प्रति क्विंटल रह गए हैं। कोलकाता की मंडियों में कीमतें प्रति क्विंटल 1,500 से 1,550 से घटकर प्रति क्विंटल 1,100 से 1,200 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गई हैं। इंदौर में दाम प्रति क्विंटल 500-1,400 से फिसलकर प्रति क्विंटल 300 से 900 के दायरे में आ गए हैं, जबकि दिल्ली में भी भाव प्रति क्विंटल 800-1,400 से गिरकर प्रति क्विंटल 300 से 900 दर्ज किए गए।
लुधियाना में आलू प्रति क्विंटल 1,000-1,200 से घटकर प्रति क्विंटल 700 से 750 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। थोक बाजार की कमजोरी का असर खुदरा कीमतों पर भी दिखने लगा है। जो आलू पिछले महीने प्रति किलो 20 से 25 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा था, वह अब कई जगह प्रति किलो 13 से 20 रुपए पर उपलब्ध है।
हालाँकि, अगले महीने से कुछ राहत मिल सकती है। जैसे-जैसे बड़ी मात्रा कोल्ड स्टोरेज में जाएगी और मंडियों में रोजाना आवक घटेगी, कीमतों में पहले स्थिरता और फिर धीरे-धीरे सुधार की संभावना बन सकती है।
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