मत्स्य पालन मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, भारत के समुद्री उत्पाद (सीफूड) निर्यात क्षेत्र से होने वाली कमाई वर्ष 2013-14 के 30,213 करोड़ रुपय से बढ़कर 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपय के स्तर पर पहुँच गई है। करीब सात प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर के साथ निर्यात का यह आंकड़ा पिछले दस वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है।
इस शानदार वृद्धि के पीछे ‘झींगा’ सबसे बड़ा कारण रहा है, जिसने अकेले 43,334 करोड़ रुपय का निर्यात मूल्य अर्जित किया है। झींगा आज भी इस पूरे क्षेत्र का मुख्य इंजन बना हुआ है। भारत की बढ़ती वैश्विक साख का ही नतीजा है कि देश अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक बन गया है, जो कुल वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत की प्रभावशाली हिस्सेदारी रखता है।
सरकारी निवेश ने भी इस क्षेत्र की उड़ान को नई ऊर्जा दी है। वर्ष 2015 से अब तक इस सेक्टर में 39,272 करोड़ रुपय का निवेश किया गया है, जिसका सीधा लाभ लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों को मिला है। घरेलू मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय उछाल देखा गया है, जो वर्ष 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर अब 197.75 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है।
भारतीय समुद्री उत्पादों की मांग अब दुनिया के कोने-कोने में है और आज भारत 130 से अधिक देशों को 350 से ज्यादा उत्पादों का निर्यात कर रहा है। अमेरिका भारतीय सीफूड का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जहाँ कुल निर्यात का 36 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भेजा जाता है। इसके अलावा चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य पूर्व के देशों में भी भारतीय समुद्री उत्पादों की भारी मांग बनी हुई है।
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