जी हां, पिछले कुछ समय से गेहूं के निर्यात पर पाबंदियों के बीच, सरकार ने घरेलू स्टॉक और कीमतों की समीक्षा करने के बाद यह फैसला लिया है। यह मंजूरी खास तौर पर उन देशों के लिए राहत लेकर आएगी जो अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए भारत पर निर्भर हैं।”
केंद्र सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात को 5 लाख टन तक की अनुमति दे दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस कोटे के लिए निर्यात प्राधिकरण हेतु आवेदन का पहला दौर 21 से 31 जनवरी के बीच स्वीकार किया जाएगा। इसके बाद, जब तक निर्यात विंडो खुली रहेगी, हर महीने के अंतिम 10 दिनों में आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
जारी किए गए निर्यात अनुमोदन छह महीने तक वैध होंगे और किसी भी प्रकार के विस्तार पर विशेष एक्सिम सुविधा समिति द्वारा मामले-दर-मामले के आधार पर विचार किया जाएगा। वैध आयातक-निर्यातक कोड यानी आईईसी और एफएसएसएआई विनिर्माण लाइसेंस रखने वाली आटा मिलें और प्रसंस्करण इकाइयाँ इस योजना के तहत आवेदन की पात्र होंगी।
इसके अलावा, वैध आईईसी, एफएसएसएआई लाइसेंस और आटा मिलों के साथ गठजोड़ रखने वाले मर्चेंट एक्सपोर्टर भी निर्यात प्राधिकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब मौजूदा रबी सीजन में गेहूं की मजबूत फसल की उम्मीदें बनी हुई हैं और घरेलू कीमतों में संभावित गिरावट को लेकर व्यापारियों की चिंताएँ बढ़ रही थीं।
गौरतलब है कि इस वर्ष देश का गेहूं उत्पादन पिछले सत्र के रिकॉर्ड 1179.4 लाख टन से अधिक रहने का अनुमान है, जिसे अधिक बुवाई क्षेत्र और अनुकूल फसल परिस्थितियों का समर्थन मिला है। भारत का यह कदम ग्लोबल फूड मार्केट में हमारी धाक जमाने वाला है। आपको क्या लगता है, क्या इससे घरेलू बाजार में आटे की कीमतें बढ़ेंगी या स्थिर रहेंगी?
यह भी पढ़े: भारत द्वारा बांग्लादेश को बड़ी मात्रा में चावल निर्यात और थाईलैंड के सामने नई चुनौतियां..!
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें एवं कृषि जागृति, स्वास्थ्य सामग्री, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।