केंद्र सरकार ने आगामी खरीफ सीजन के लिए देश के किसानों को उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु कमर कस ली है। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार ने रिकॉर्ड 25 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए एक बड़ा वैश्विक टेंडर जारी किया है।
सरकारी कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड ने दो अलग-अलग टेंडर आमंत्रित किए हैं। इसके तहत 15 लाख टन यूरिया का आयात देश के पश्चिमी तट के बंदरगाहों के माध्यम से किया जाएगा, जबकि शेष 10 लाख टन पूर्वी बंदरगाहों के जरिए मंगाया जाएगा।
बोलियां आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 15 अप्रैल तय की गई है। योजना के अनुसार, आयातित यूरिया की पहली खेप 14 जून से भारतीय तटों पर पहुंचने लगेगी, जो कि खरीफ फसलों की बुवाई के पीक समय के साथ बिल्कुल सटीक बैठता है।
खरीफ सीजन की शुरुआत जून में मानसून के आगमन के साथ होती है, जिसमें धान, मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई की जाती है। इन फसलों के शुरुआती विकास चरणों में यूरिया और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता बेहद निर्णायक होती है। किसी भी स्तर पर हुई देरी सीधे तौर पर देश के कुल खाद्य उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
भारत अपनी उर्वरक जरूरतों, विशेषकर यूरिया, डीएपी और पोटाश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर काफी निर्भर है। मध्य पूर्व के देश, विशेषकर ओमान और सऊदी अरब, भारत के सबसे विश्वसनीय साझेदार बने हुए हैं, जहाँ से हमारी कुल आयात जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा पूरा होता है।
सरकार का यह सक्रिय कदम जमाखोरी और कालाबाजारी की संभावनाओं को भी कम करेगा। इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के माध्यम से किया जा रहा यह आयात यह सुनिश्चित करेगा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा बोझ किसानों की जेब पर न पड़े, क्योंकि सरकार उर्वरकों पर भारी सब्सिडी देती है।
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