मौसम विभाग यानी आईएमडी ने फरवरी के लिए जारी अपने ताज़ा पूर्वानुमान में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और औसत से कम वर्षा की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार न्यूनतम और अधिकतम तापमान दोनों ही सामान्य स्तर से ऊपर रह सकते हैं, जिससे रबी फसलों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
मौसम की यह स्थिति गेहूं, सरसों, चना और मसूर जैसी प्रमुख फसलों के लिए संवेदनशील साबित हो सकती है, क्योंकि वे इस समय वृद्धि और दाना भराव के अहम चरण में हैं। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल तेजी से पक सकती है, जिससे दानों का भराव प्रभावित होने और उपज घटने का जोखिम बढ़ जाता है। तिलहन और दलहन फसलों में समयपूर्व फूल आने और फलियों की संख्या कम रहने की आशंका भी जताई जा रही है।
गर्म और शुष्क परिस्थितियां एफिड्स सहित रस चूसने वाले कीटों के प्रकोप को भी बढ़ा सकती हैं, जिससे फसल सुरक्षा की चुनौती बढ़ेगी। स्थिति को देखते हुए आईएमडी ने कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि एवं अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के साथ समन्वय कर कृषि परामर्श जारी किया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फूल आने और दाना भरने की अवस्था में हल्की लेकिन अंतराल पर सिंचाई करें तथा खेतों में कीटों की नियमित निगरानी रखें।
विभाग का अनुमान है कि फरवरी में वर्षा दीर्घकालिक औसत के 81 प्रतिशत से कम रह सकती है। हालांकि तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा संभव है। फरवरी में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना ने रबी उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है और आने वाले हफ्ते फसल के लिहाज से निर्णायक माने जा रहे हैं।
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