उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के एक प्रगतिशील गन्ना किसान ने वैज्ञानिक खेती के जरिए उत्पादकता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर राष्ट्रीय पहचान हासिल की है। गोला तहसील के मेदईपुरवा गांव निवासी 40 वर्षीय अचल मिश्रा ने ट्रेंच पिट विधि अपनाकर और स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप गन्ना बीज किस्मों का चयन कर अपनी पैदावार लगभग दोगुनी कर ली है।
मिश्रा को हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से गन्ना खेती में नवाचार के लिए इननोवेटिव फार्मर प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। कानून स्नातक होने के बावजूद उन्होंने खेती को करियर के रूप में अपनाया और पारंपरिक पद्धतियों से हटकर आधुनिक तकनीकों के साथ प्रयोग शुरू किए। ट्रेंच पिट विधि और विभिन्न बीज किस्मों के परीक्षण के बाद मिश्रा की गन्ना उत्पादकता 300 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़कर 550 से 600 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुँच गई है। उनका फोकस स्थानीय मौसम और मिट्टी की परिस्थितियों के अनुसार खेती कर अधिकतम उत्पादन हासिल करने पर रहा है।
उन्होंने गन्ने के साथ अंतरवर्तीय फसलों सरसों, आलू, लहसुन और गेंदा को भी अपनाया है। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बेहतर हुई, बल्कि अतिरिक्त आय के स्रोत भी बने और खेती का जोखिम घटा। उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिश्रा ने मूल्य संवर्धन और विपणन पर भी ध्यान दिया है। उन्होंने एक किसान उत्पादक संगठन के जरिए गुड़ और काला नमक चावल जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों का विपणन शुरू किया है, जिससे क्षेत्र के अन्य किसान भी लाभान्वित हो रहे हैं।
चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संबद्ध कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और जिला प्रशासन ने उनके प्रयासों की सराहना की है। इससे पहले भी मिश्रा को मिलेनियम फार्मर अवॉर्ड मिल चुका है। आईसीएआर से मिली ताज़ा मान्यता यह दर्शाती है कि किसान-नेतृत्व वाले नवाचार गन्ना पट्टी में उत्पादकता और आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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