मार्च के मध्य में हुई समय पर बारिश ने पंजाब और हरियाणा में गेहूं की फसल को बड़ी राहत दी है। तापमान जहां पहले 34 से 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, वहीं हालिया बारिश और ठंडे मौसम के बाद यह घटकर 18 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच आ गया है। इससे दाना भराव की अवस्था में फसल को संभलने का मौका मिला है।
बारिश के कारण दाने के विकास में सुधार, सिंचाई की आवश्यकता में कमी और इनपुट लागत में भी गिरावट देखने को मिली है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्का लॉजिंग यानी फसल गिरना दर्ज किया गया, लेकिन इसका असर सीमित रहा है।
अधिकारियों के अनुसार फिलहाल फसल की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है और यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस बार बेहतर उत्पादन की संभावना है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बारिश या तेज हवाएं अभी भी जोखिम पैदा कर सकती हैं। अनुमान है कि 10 अप्रैल से गेहूं की आवक शुरू होगी और ऐसे में मौसम में आया यह सुधार उत्पादन और गुणवत्ता दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, यह बेमौसम नहीं बल्कि ‘समय पर हुई बारिश’ है। जहां फरवरी के अंत में गर्मी ने चिंता बढ़ा दी थी, वहीं मार्च की इस बारिश ने गेहूं की फसल के लिए ‘गोल्डन ड्रॉप्स’ (अमृत की बूंदों) का काम किया है। यदि मौसम इसी तरह मेहरबान रहा, तो इस साल भारत गेहूं उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।
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