भारत दलहन एवं अनाज एसोसिएशन (आईपीजीए) के अनुसार वित्त वर्ष के अंत से पहले बाजार गतिविधियों में सुस्ती के चलते निकट अवधि में दलहनों के दाम दबाव में रह सकते हैं और कारोबार सीमित दायरे में होने की संभावना है। चना की कीमतें कई मंडियों में एमएसपी से नीचे बनी हुई हैं, जबकि सरकार ने 5,875 रुपय प्रति क्विंटल पर 25 लाख टन खरीद को मंजूरी दी है।
हालांकि अभी तक बड़े पैमाने पर खरीद शुरू नहीं हुई है, लेकिन आवक को डायवर्ट करने से आगे चलकर कीमतों को कुछ सहारा मिल सकता है। पिछले सप्ताह इंदौर में चना के भाव 5,550 से 5,625 रुपय प्रति क्विंटल तक मजबूत हुए, जबकि जयपुर में अधिक आवक के कारण कीमतें घटकर 5,425 रुपय प्रति क्विंटल रह गईं।
तूर के दाम पर्याप्त आपूर्ति और कमजोर मांग के चलते दबाव में हैं। स्टॉकिस्ट फिलहाल सक्रिय नहीं हैं, जिससे अकोला जैसे प्रमुख बाजारों में कीमतें घटकर 8,050 से 8,075 रुपय प्रति क्विंटल तक आ गई हैं। त्योहारों के कारण बाजार बंद रहने से कारोबार पर और असर पड़ा है।उड़द के दाम भी सीमित दायरे में बने रहने की संभावना है।
कमजोर मांग के कारण तेजी सीमित है, हालांकि कम रबी आवक और स्थिर आयात के चलते कीमतों में बड़ी गिरावट भी नहीं देखी जा रही।चंदौसी में सीमित आपूर्ति के कारण भाव बढ़कर 8,300 रुपय प्रति क्विंटल तक पहुंचे, जबकि गुंटूर में कीमतें 8,350 से 8,375 रुपय प्रति क्विंटल के बीच नरम रहीं। कुल मिलाकर आने वाले हफ्तों में दलहन बाजार की दिशा सरकारी खरीद की रफ्तार, नई फसल की आवक और आयात की स्थिति पर निर्भर करेगी।
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