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भारत-अमेरिका समझौता के तहत चावल निर्यात को मिला प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त..!

06/02/2026 by krishijagriti5

क्या भारत का ‘सफेद सोना’ अब अमेरिकी बाजारों पर राज करेगा? हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापारिक समझौतों ने भारतीय चावल निर्यातकों के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है। यह सिर्फ एक डील नहीं है, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भारत की ‘प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त’ की एक बड़ी कहानी है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने से भारतीय चावल निर्यातकों को उल्लेखनीय राहत मिली है। भारतीय चावल निर्यातक संघ (आईआरईएफ) का मानना है कि इस निर्णय से भारत को थाईलैंड और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों से अच्छा शुल्क स्तर मिल गया है, जहां आयात शुल्क लगभग 19 प्रतिशत है। इससे अमेरिकी बाजारों में भारतीय चावल की कीमत अधिक प्रतिस्पर्धी होगी और बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग के अनुसार, यह राहत ऐसे समय आई है जब देश रिकॉर्ड 1490 लाख टन उत्पादन और पर्याप्त घरेलू उपलब्धता के साथ नए निर्यात सत्र में प्रवेश कर रहा है। उनका कहना है कि शुल्क में कमी से बासमती और गैर-बासमती दोनों श्रेणियों के निर्यात को गति मिल सकती है। आईआरईएफ ने यह भी रेखांकित किया कि ऊंचे शुल्क के बावजूद अमेरिका को भारतीय चावल की आपूर्ति लगातार बढ़ती रही, जो वहां भारतीय चावल की मजबूत मांग और गुणवत्ता पर भरोसे को दर्शाता है।

संघ ने ईरान के साथ संभावित व्यापार व्यवधानों को लेकर उठ रही अटकलों को भी खारिज किया और कहा कि फिलहाल निर्यात प्रवाह पर किसी तात्कालिक असर की आशंका नहीं है। उल्लेखनीय है कि यह शुल्क कटौती 2 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई घोषणा के बाद प्रभावी हुई, जिसके तहत भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क भी वापस ले लिया गया।

यह भी पढ़े: अच्छी मांग के मुकाबले सीमित आपूर्ति से दलहन की कीमतों में मजबूती के संकेत..!

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Filed Under: कृषि समाचार Tagged With: India-US Trade Agreement, Indian Rice Exporters, Indian Rice Exports

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