यूपी में किसान कर्ज माफी कब होगी? तमिलनाडु सरकार के बड़े फैसले के बाद तेज हुई मांग

तमिलनाडु सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए फसल ऋण माफी की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय ने सहकारी बैंकों से लिए गए फसल ऋण को माफ करने का ऐलान किया है। इस फैसले के तहत सीमांत किसानों का 50 हजार रुपये तक का फसल ऋण पूरी तरह माफ किया जाएगा, जबकि अन्य किसानों को भी राहत देने की बात कही गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देशभर का किसान बढ़ती लागत, मौसम की मार और लगातार घटती आमदनी से जूझ रहा है।

राज्य सरकार के अनुसार इस योजना का लाभ करीब 14.22 लाख किसानों को मिलेगा। सरकार पर लगभग 2044 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आएगा, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने किसानों को राहत देना जरूरी समझा। यह फैसला सिर्फ आर्थिक मदद नहीं बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

लगातार बढ़ती खाद, बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई लागत के बीच छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा दबाव में हैं। ऐसे में कर्जमाफी जैसी योजनाएं उन्हें नई शुरुआत करने का मौका देती हैं। तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया है कि 1 मई 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच सहकारी बैंकों से लिए गए फसल ऋण इस योजना के दायरे में आएंगे।

सीमांत किसानों का 50 हजार रुपये तक का पूरा ऋण माफ किया जाएगा। इससे किसान आगामी खरीफ और रबी सीजन की तैयारी बिना मानसिक दबाव के कर पाएंगे। सरकार का कहना है कि खेती को बचाने और किसानों को मजबूत करने के लिए यह फैसला जरूरी था। आज देश के कई राज्यों में किसान कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है।

खेती की लागत लगातार बढ़ रही है लेकिन किसानों की आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही। डीजल महंगा, खाद महंगी, बीज महंगे, मजदूरी महंगी और ऊपर से मौसम की मार। कभी सूखा, कभी बाढ़, कभी ओलावृष्टि और कभी फसलों के सही दाम नहीं मिलते। ऐसी स्थिति में किसान बैंक और साहूकार दोनों के कर्ज में फंसता चला जाता है।

इसलिए तमिलनाडु सरकार का यह फैसला किसानों को राहत देने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तमिलनाडु सरकार किसानों को राहत दे सकती है तो उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए ऐसी घोषणा कब होगी? यूपी देश का सबसे बड़ा कृषि प्रधान राज्य है। यहां लाखों किसान सहकारी बैंकों और निजी संस्थानों के कर्ज में दबे हुए हैं।

गन्ना भुगतान में देरी, गेहूं और धान के कम दाम, बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों की कमर तोड़ दी है। ऐसे में यूपी के किसानों को भी तत्काल राहत की जरूरत है। उत्तर प्रदेश के छोटे और सीमांत किसान आज सबसे ज्यादा परेशान हैं। एक तरफ खेती की लागत बढ़ती जा रही है, दूसरी तरफ फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा।

किसान अपनी फसल बेचकर भी कर्ज नहीं चुका पा रहा। कई किसान तो सिर्फ ब्याज भरते-भरते ही टूट जाते हैं। ऐसे समय में यूपी सरकार को भी किसानों के लिए फसल ऋण माफी की घोषणा करनी चाहिए ताकि किसान नई उम्मीद के साथ खेती जारी रख सके।किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है।

अगर किसान कमजोर होगा तो गांव कमजोर होंगे, खेती कमजोर होगी और देश की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी। इसलिए किसानों को राहत देना सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। तमिलनाडु सरकार ने जो कदम उठाया है, वह दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कर्जमाफी किसानों को तात्कालिक राहत देती है लेकिन लंबे समय के लिए खेती को मजबूत बनाने के लिए सिंचाई, बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक, बाजार व्यवस्था और फसल के सही दाम जैसी व्यवस्थाओं में सुधार भी जरूरी है। किसान को सिर्फ कर्जमाफी नहीं बल्कि लाभकारी खेती का मॉडल चाहिए।

लेकिन फिलहाल जो किसान कर्ज में डूबे हुए हैं, उनके लिए यह राहत किसी संजीवनी से कम नहीं है। यूपी के किसानों की मांग है कि राज्य सरकार भी छोटे और सीमांत किसानों का कम से कम 50 हजार रुपये तक का फसल ऋण माफ करे। सहकारी बैंकों और किसान क्रेडिट कार्ड के कर्ज में फंसे किसानों को तत्काल राहत दी जाए।

साथ ही किसानों के लिए ब्याज मुक्त ऋण, फसल बीमा की पारदर्शी व्यवस्था और फसलों का लाभकारी समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जाए। आज जरूरत इस बात की है कि किसान सिर्फ चुनावी वादों का हिस्सा न बने बल्कि उसकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए। खेती बचानी है तो किसान को बचाना होगा। किसान मजबूत होगा तभी गांव मजबूत होंगे और देश आगे बढ़ेगा।

अगर आप भी मानते हैं कि यूपी के किसानों को भी तमिलनाडु की तरह कर्जमाफी मिलनी चाहिए?

निष्कर्ष: तमिलनाडु सरकार द्वारा सहकारी बैंकों से लिए गए फसल ऋण की माफी (विशेषकर सीमांत किसानों के लिए 50 हजार रुपये तक) देश के अन्नदाताओं को संकट से उबारने की दिशा में एक सराहनीय और संबल देने वाला कदम है।

आज जब बढ़ती लागत, मौसम की मार और कर्ज के जाल के कारण देशभर का किसान- विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि प्रधान राज्य का किसान- आर्थिक और मानसिक दबाव झेल रहा है, तब ऐसी योजनाएं उन्हें एक नई शुरुआत करने की ‘संजीवनी’ देती हैं।

हालांकि, कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खेती को दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लाभकारी मूल्य, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था जैसे स्थायी समाधान जरूरी हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यूपी के संकटग्रस्त छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी तमिलनाडु की तर्ज पर तत्काल कर्जमाफी और ब्याज मुक्त ऋण जैसी राहत बेहद आवश्यक है, क्योंकि किसान मजबूत होगा तभी देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

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