यदि आप पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी, सब्जी उत्पादन या आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना चाहते हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश सरकार के उद्यान विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) योजना के अंतर्गत किसानों को विभिन्न बागवानी एवं कृषि यंत्रीकरण कार्यक्रमों पर 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। राजकीय उद्यान विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते पंजीकरण कराकर इस योजना का लाभ उठाएं, क्योंकि चयन “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर किया जाएगा।
वर्ष 2026-27 के लिए उद्यान विभाग का लक्ष्य
राजकीय उद्यान विभाग के अनुसार जनपद में वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न योजनाओं के लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। योजना का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ फल, सब्जी, मसाला और फूलों की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके और खेती अधिक लाभकारी बन सके। सरकार का मानना है कि यदि किसान आधुनिक बागवानी तकनीकों को अपनाते हैं, तो कम क्षेत्रफल में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
फल उद्यान, पावर टिलर और मधुमक्खी पालन पर 50% तक सब्सिडी
इस योजना के तहत संकर शाकभाजी क्षेत्र विस्तार के लिए 10 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। संकर किस्मों की सब्जियां सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक उत्पादन देती हैं और बाजार में इनकी मांग भी अधिक रहती है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इनकी खेती करें, तो अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।
मसाला फसलों को बढ़ावा देने के लिए प्याज और लहसुन क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य 240 हेक्टेयर रखा गया है। प्याज और लहसुन ऐसी नकदी फसलें हैं जिनकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है। सही भंडारण और उचित समय पर बिक्री करके किसान अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना के माध्यम से सरकार किसानों को इन फसलों की खेती बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करेगी।
इसके अलावा पुष्प खेती को बढ़ावा देने के लिए चार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। फूलों की खेती आज के समय में तेजी से उभरता हुआ व्यवसाय है। धार्मिक आयोजनों, शादी-विवाह, होटल, सजावट और निर्यात में फूलों की लगातार मांग बनी रहती है। ऐसे में फूलों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का एक अच्छा विकल्प बन सकती है।
इस योजना के अंतर्गत नवीन फल उद्यान लगाने पर भी अनुदान दिया जाएगा। इसमें आम, अमरूद और नींबू जैसे फलदार पौधों का रोपण शामिल है। फलों के बाग लगाने से किसानों को लंबे समय तक नियमित आय प्राप्त हो सकती है। हालांकि फलदार पौधों में प्रारंभिक निवेश अधिक होता है, लेकिन सरकार द्वारा दी जा रही 40 से 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी इस निवेश का बोझ काफी कम कर देती है।
कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए 8 बीएचपी तक के पावर टिलर पर भी अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। छोटे और सीमांत किसानों के लिए पावर टिलर खेती के कई कार्यों को आसान बनाता है। इससे जुताई, गुड़ाई और अन्य कृषि कार्य कम समय और कम लागत में किए जा सकते हैं।
इस योजना में मधुमक्खी पालन की दो इकाइयों पर भी अनुदान का प्रावधान है। मधुमक्खी पालन से शहद उत्पादन के साथ-साथ फसलों में परागण भी बेहतर होता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है। यह खेती के साथ अतिरिक्त आय का एक अच्छा स्रोत बन सकता है।
ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और आधुनिक तकनीकों से बढ़ेगी किसानों की आय
आज के समय में तेजी से लोकप्रिय हो रही ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को भी योजना में शामिल किया गया है। इन फसलों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है और यदि किसान उचित तकनीक अपनाकर खेती करें, तो कम क्षेत्रफल में भी बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त फ्रूट बंच कवर, इको-फ्रेंडली लाइट ट्रैप तथा मचान स्थापना जैसी आधुनिक तकनीकों पर भी निर्धारित मानकों के अनुसार 35 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। ये तकनीकें फसलों की गुणवत्ता सुधारने, कीट प्रबंधन करने और उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
MIDH योजना में आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज और पोर्टल रजिस्ट्रेशन
यदि आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो जल्द से जल्द डीबीटी हॉर्टीकल्चर पोर्टल या अपने राजकीय उद्यान कार्यालय में पंजीकरण कराएं। आवेदन के लिए सामान्यतः आधार कार्ड, खतौनी, बैंक पासबुक, पासपोर्ट आकार का फोटो तथा कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के लिए मशीन की अधिकृत कोटेशन जैसे आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र किसानों को योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा।
किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अनुदान सीमित लक्ष्य के अनुसार दिया जाएगा। इसलिए अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन करना अधिक लाभदायक रहेगा। जिन किसानों का आवेदन पहले और सही दस्तावेजों के साथ प्राप्त होगा, उन्हें प्राथमिकता मिलने की संभावना अधिक रहेगी।
यह योजना केवल सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ खेती की ओर ले जाने का प्रयास भी है। यदि किसान सरकारी योजनाओं का सही समय पर लाभ उठाते हैं, तो उनकी खेती की लागत कम हो सकती है, उत्पादन बढ़ सकता है और आय के नए स्रोत विकसित हो सकते हैं।
यदि आप या आपके आसपास कोई किसान बागवानी, सब्जी उत्पादन, फलों का बाग, मधुमक्खी पालन, कृषि यंत्रीकरण या उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो यह योजना उनके लिए एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है। समय रहते पंजीकरण करें और सरकार द्वारा दी जा रही 40 से 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी का लाभ उठाकर अपनी खेती को नई दिशा दें।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q. यूपी एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) योजना के तहत कितनी सब्सिडी मिल रही है?
उत्तर: इस योजना के अंतर्गत किसानों को फल, सब्जी, मसाला, पुष्प खेती, कृषि यंत्रीकरण (पावर टिलर) और संरक्षण तकनीकों पर 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान (सब्सिडी) दिया जा रहा है।
Q. MIDH योजना में सब्सिडी का लाभ पाने के लिए लाभार्थियों का चयन किस आधार पर होगा?
उत्तर: योजना के तहत अनुदान सीमित लक्ष्य के अनुसार दिया जाएगा और पात्र किसानों का चयन “पहले आओ, पहले पाओ” के सिद्धांत के आधार पर किया जाएगा।
Q. योजना के अंतर्गत कौन-कौन सी प्रमुख फसलों और घटकों को शामिल किया गया है?
उत्तर: इसमें संकर सब्जियां, प्याज व लहसुन, फूलों की खेती, नवीन फल उद्यान (आम, अमरूद, नींबू), ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, मधुमक्खी पालन, 8 बीएचपी तक के पावर टिलर और फ्रूट बंच कवर जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं।
Q. MIDH योजना में आवेदन करने के लिए किन आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत होगी?
उत्तर: आवेदन के लिए किसान के पास आधार कार्ड, जमीन की खतौनी, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो और कृषि यंत्रों/मशीनों के लिए अधिकृत डीलर की कोटेशन होना आवश्यक है।
Q. इस योजना के तहत किसान आवेदन कैसे और कहाँ कर सकते हैं?
उत्तर: इच्छुक किसान DBT Horticulture Portal पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं या अपने जनपद के राजकीय उद्यान कार्यालय में संपर्क करके ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
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मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
