भारत का ब्राजील से उड़द आयात इस वर्ष कम से कम 25 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। व्यापारिक आकलनों के अनुसार, मई-जून की फसल से आपूर्ति करीब 3 लाख टन तक पहुंच सकती है। भारत दलहन एवं अनाज संघ (आईपीजीए) के अध्यक्ष बिमल कोठारी के अनुसार फरवरी-मार्च बुवाई के दौरान ब्राजील में मजबूत कीमतों और अग्रिम बिक्री संकेतों के कारण रकबा बढ़ाया गया।
लगभग 90 दिन की फसल अवधि ब्राजील को त्वरित आपूर्ति विस्तार में सक्षम बनाती है। वर्ष 2025 में भारत वहां से 2.37 लाख टन से अधिक उड़द आयात कर चुका है। घरेलू आपूर्ति दबाव के बीच आयात में तेजी आई है। कैलेंडर वर्ष 2025 में कुल उड़द आयात 41 प्रतिशत बढ़कर 10.67 लाख टन पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 7.58 लाख टन था।
उत्पादन में मौसम जनित कमी इसका प्रमुख कारण रही। म्यानमार 8.09 लाख टन के साथ प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जबकि ब्राजील 2.37 लाख टन के साथ दूसरे स्थान पर है। मार्च अंत तक जारी शुल्क छूट से आयात को अतिरिक्त समर्थन मिला है। घरेलू स्तर पर 2025-26 खरीफ सीजन में उड़द उत्पादन 12.05 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 13.41 लाख टन से कम है।
2024-25 में कुल वार्षिक उत्पादन 22.42 लाख टन रहा था। विश्लेषकों का मानना है कि ब्राजील के उभरते स्रोत के रूप में मजबूत होने और मौसम जोखिमों के चलते भारत की आयात रणनीति म्यांमार पर निर्भरता से आगे बढ़कर अधिक विविधीकृत होती दिख रही है। म्यांमार अभी भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर है, लेकिन ब्राजील के आने से बाजार में विकल्प बढ़ गए हैं।
इससे कीमतों में होने वाले अचानक उछाल पर लगाम लगेगी और आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी। लेकिन ब्राजील अब भारत के लिए दालों का एक विश्वसनीय पार्टनर बनकर उभर रहा है। घरेलू पैदावार में गिरावट के बावजूद, सरकार के समय पर लिए गए फैसलों और ब्राजील से बढ़ते आयात के कारण देश में उड़द की सप्लाई बनी रहेगी। हालांकि, किसानों के लिए यह जरूरी है कि वे बाजार के इन रुझानों को समझकर अपनी फसल की बिक्री का सही समय चुनें।
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