आज के समय में खेती की बढ़ती लागत के साथ-साथ नकली उर्वरकों की समस्या भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। कई बार किसान बाजार से पूरी कीमत देकर यूरिया खरीदता है, लेकिन बाद में पता चलता है कि खाद की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। इसका सीधा असर फसल की बढ़वार, उत्पादन और किसान की आय पर पड़ता है। इसलिए यूरिया खरीदते समय उसकी पहचान करना हर किसान के लिए बेहद जरूरी है।
असली यूरिया के दानों की भौतिक पहचान
असली यूरिया की सबसे पहली पहचान उसके दानों से होती है। इसके दाने सफेद, चमकदार, लगभग एक समान आकार के और कड़े होते हैं। यदि दानों का आकार बहुत ज्यादा अलग-अलग हो, उनमें धूल या अधिक टूटे हुए कण हों, या उनका रंग पीला या मटमैला दिखाई दे, तो किसान को सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि केवल दानों का रंग देखकर ही किसी उर्वरक को नकली या असली नहीं कहा जा सकता, इसलिए अन्य पहचान भी जरूरी है।
असली और नकली यूरिया की जांच के 2 घरेलू टेस्ट
1. पानी में घुलनशीलता और ठंडक का परीक्षण
असली यूरिया पानी में डालने पर पूरी तरह घुल जाता है और कोई ठोस अवशेष नहीं छोड़ता। जब यूरिया पानी में घुलता है तो यह ऊष्मा को अवशोषित करता है, इसलिए घोल को हाथ से छूने पर हल्की ठंडक महसूस होती है। यह यूरिया का सामान्य रासायनिक गुण है और इसकी एक महत्वपूर्ण पहचान भी मानी जाती है।
2. लोहे के तवे पर गर्म करने का पारंपरिक तरीका
एक पारंपरिक परीक्षण यह भी है कि यदि थोड़ी मात्रा में यूरिया को लोहे के तवे पर गर्म किया जाए तो इसके दाने पिघलने लगते हैं। गर्मी बढ़ाने पर यूरिया पूरी तरह विघटित हो जाता है और सामान्यतः कोई ठोस अवशेष नहीं बचता। यदि गर्म करने के बाद काफी मात्रा में राख या अन्य ठोस पदार्थ बच जाएं, तो उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह हो सकता है। हालांकि यह केवल एक सामान्य परीक्षण है और इससे किसी उत्पाद की गुणवत्ता का अंतिम वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता।
यूरिया खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
यूरिया खरीदते समय केवल घरेलू परीक्षणों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। हमेशा अधिकृत और लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेता से ही खाद खरीदें। खरीद के समय पक्का बिल अवश्य लें और बोरी पर निर्माता कंपनी का नाम, बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) के अनुसार अंकित जानकारी जरूर जांचें। यदि पैकिंग फटी हुई हो, सील टूटी हो या लेबल संदिग्ध लगे तो ऐसी बोरी खरीदने से बचें।
खाद नकली होने का संदेह होने पर कहाँ शिकायत करें?
यदि किसी किसान को संदेह हो कि खरीदा गया यूरिया मानक के अनुरूप नहीं है, तो उसे स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय अपने क्षेत्र के कृषि विभाग, कृषि विकास अधिकारी या उर्वरक निरीक्षक से संपर्क करना चाहिए। आवश्यकता होने पर विभाग नमूना लेकर प्रयोगशाला में उसकी जांच कर सकता है और यदि उर्वरक अमानक पाया जाता है तो संबंधित विक्रेता या निर्माता के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
यह भी याद रखें कि असली यूरिया तभी पूरा लाभ देता है जब उसका उपयोग सही समय, सही मात्रा और सही विधि से किया जाए। आवश्यकता से अधिक यूरिया डालने से फसल को लाभ नहीं बल्कि नुकसान भी हो सकता है। इसलिए मिट्टी परीक्षण और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही यूरिया का प्रयोग करें।
जागरूक किसान ही अपनी फसल और अपनी मेहनत की कमाई दोनों की सुरक्षा कर सकता है। इसलिए खाद खरीदते समय जल्दबाजी न करें, उत्पाद की जांच करें, बिल लें और किसी भी प्रकार की शंका होने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचना दें।
निष्कर्ष: फसल की अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन के लिए यूरिया एक बेहद महत्वपूर्ण खाद है। बाजार में यूरिया की भारी मांग के बीच इसकी गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहना हर किसान भाई के लिए जरूरी है।
पानी में घोलने का टेस्ट या तवे पर गर्म करने का घरेलू तरीका प्राथमिक जांच के लिए तो ठीक है, लेकिन शुद्धता का असली और कानूनी प्रमाण केवल अधिकृत कृषि प्रयोगशाला की जांच से ही मिलता है। इसलिए हमेशा लाइसेंसधारी दुकान से ही यूरिया खरीदें, पक्का बिल अवश्य लें और जागरूक रहकर अपनी फसल व गाढ़ी कमाई दोनों को सुरक्षित रखें।
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मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
