आपूर्ति में आई कमी, लगातार घटते कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक और मौजूदा खरीफ फसल पर अल नीनो के संभावित प्रतिकूल प्रभाव की आशंकाओं के बीच देशभर की मंडियों में हल्दी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। कृषि बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की कमजोर शुरुआत, शुष्क मौसम और आगामी नई फसल को लेकर बढ़ती चिंताओं ने हल्दी की कीमतों में जोरदार तेजी ला दी है।
इरोड मंडी में ₹200 तक पहुंचे हल्दी के दाम: जानें तेजी के मुख्य कारण
तमिलनाडु की प्रमुख इरोड कृषि उपज मंडी समिति में हल्दी का भाव बेहद कम समय में 160 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 200 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, बाद में उच्च स्तरों पर मुनाफावसूली और बाजार में सामंजस्य के कारण भाव थोड़ा घटकर करीब 170 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए।
इरोड हल्दी व्यापारी संघ के अध्यक्ष आर. के. वी. रविशंकर के अनुसार, इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे मुख्य वजहें कम बारिश, अगली फसल को लेकर अनिश्चितता और पिछले 3 से 4 वर्षों के दौरान जमा कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक में आई भारी गिरावट हैं। इसके साथ ही, वायदा और हाजिर बाजार में सट्टेबाजी की खरीदारी ने भी कीमतों को ऊपर खींचने का काम किया है।
एग्रीवॉच’ का विश्लेषण: मिट्टी में नमी की कमी से उत्पादन प्रभावित होने की चिंता
बाजार अनुसंधान संस्था ‘एग्रीवॉच’ के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक बिप्लब शर्मा ने बताया कि मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में लंबे समय से जारी शुष्क मौसम के कारण फसल की संभावनाओं पर असर पड़ा है, जिससे बाजार में मजबूती बनी हुई है। उन्होंने सचेत किया कि यदि फसलों की शुरुआती वृद्धि के चरण के दौरान मिट्टी में नमी की कमी बनी रहती है, तो इससे अंतिम उपज प्रभावित हो सकती है, जो आने वाले समय में हल्दी की कीमतों को और अधिक समर्थन दे सकती है।
खरीफ 2026 में हल्दी की बुवाई का रुझान: रकबा 16% तक बढ़ने का अनुमान
हालांकि, ऊंचे बाजार भावों से प्रेरित होकर किसानों ने चालू सीजन में हल्दी की खेती का दायरा बढ़ाया है। एग्रीवॉच के 2026 खरीफ सीजन के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार, चालू वर्ष में हल्दी का कुल बुवाई रकबा वर्ष 2025 की तुलना में 16.05 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। यह रकबा पिछले पांच वर्षों के औसत 1.88 लाख हेक्टेयर के आंकड़े को पार कर एक नया रिकॉर्ड बना सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q. इरोड मंडी में हल्दी के भाव किस स्तर तक पहुंच गए थे?
उत्तर: तमिलनाडु की इरोड मंडी में हल्दी का भाव तेजी से बढ़कर ₹200 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था, जिसके बाद मुनाफावसूली से भाव लगभग ₹170 प्रति किलोग्राम पर आ गए।
Q. हाल ही में हल्दी की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी के मुख्य कारण क्या हैं?
उत्तर: कमजोर मानसूनी बारिश, पिछले 3-4 वर्षों के कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक में भारी कमी, नई फसल को लेकर अनिश्चितता और वायदा-हाजिर बाजार में खरीदारी तेजी के मुख्य कारण हैं।
Q. वर्ष 2026 में हल्दी की बुवाई (रकबा) को लेकर क्या अनुमान है?
उत्तर: एग्रीवॉच के 2026 खरीफ सीजन के अग्रिम अनुमान के अनुसार, ऊंचे दामों के कारण हल्दी का बुवाई रकबा वर्ष 2025 की तुलना में 16.05% बढ़कर 1.88 लाख हेक्टेयर के 5-वर्षीय औसत को पार कर सकता है।
Q. मौसम का हल्दी की उपज पर क्या असर पड़ सकता है?
उत्तर: एग्रीवॉच के अनुसार, यदि फसल के शुरुआती चरण में मिट्टी में नमी की कमी बनी रहती है, तो अंतिम उत्पादन घट सकता है, जिससे आने वाले समय में कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
Q. कमजोर बारिश और मानसून की अनिश्चितता का हल्दी की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?
उत्तर: उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की कमजोर शुरुआत और लंबे समय तक बने शुष्क मौसम के कारण हल्दी की फसल की उपज प्रभावित होने की आशंका है। इसके परिणामस्वरूप आपूर्ति में कमी आई है और इरोड मंडी सहित देशभर के बाजारों में हल्दी की कीमतें बढ़कर ₹170 से ₹200 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
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