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पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय बासमती निर्यात पर असर, खेप अटकी, लागत बढ़ी

01/04/2026 by krishijagriti5

पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय बासमती निर्यात पर असर, खेप अटकी, लागत बढ़ी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत के बासमती चावल निर्यात को गंभीर झटका दिया है। निर्यात लगभग ठप है, भुगतान में देरी हो रही है और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी उछाल देखा जा रहा है। करीब 6 अरब डॉलर के इस उद्योग का लगभग आधा निर्यात पश्चिम एशिया पर निर्भर है, जहां सऊदी अरब, ईरान, इराक और यूएई जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं।

मौजूदा हालात में इन देशों को होने वाली शिपमेंट लगभग रुक गई है। निर्यातकों के अनुसार कंटेनर फ्रेट लागत 2,500 डॉलर से बढ़कर 7,000 से 9,000 डॉलर प्रति कंटेनर तक पहुंच गई है। कंटेनर की कमी और बीमा प्रीमियम में वृद्धि ने संकट को और गहरा कर दिया है। वर्तमान में करीब 10 लाख टन बासमती चावल गोदामों और बंदरगाहों पर फंसा हुआ है।

मध्य प्रदेश के रायसेन जैसे प्रोसेसिंग हब में मिलों की गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं। भुगतान में देरी के कारण निर्यातकों पर 2,000 करोड़ से 25,000 करोड़ रुपय तक की लिक्विडिटी का दबाव बन रहा है, जिसका असर अब किसानों तक भी पहुंचने लगा है। धीमी खरीद के चलते मंडी भाव पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे अगली बुवाई के फैसलों पर असर पड़ने की आशंका है।

विशेषज्ञों के अनुसार 1121 जैसी प्रीमियम बासमती किस्मों के लिए वैकल्पिक बाजार सीमित हैं, ऐसे में इस संकट से उबरना काफी हद तक भू-राजनीतिक स्थिति सामान्य होने पर निर्भर करेगा। यदि तनाव जल्द समाप्त नहीं होता है, तो भारत का बासमती उद्योग अपनी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी खो सकता है और घरेलू स्तर पर किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। सरकार और निर्यातकों को अब वैकल्पिक रास्तों और नए बाजारों की तलाश के साथ-साथ वित्तीय राहत उपायों पर विचार करने की तत्काल आवश्यकता है।

यह भी पढ़े: दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन में मक्का उत्पादन घटा; भारत में MSP पर खरीद बढ़ाने की मांग

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Filed Under: कृषि समाचार Tagged With: Agri Exports, Agriculture News, Basmati Rice Exports

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