भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचे की घोषणा के बाद कृषि जिंसो के बाजार में नरमी देखने को मिल रही है। कपास, सोयाबीन और मक्का जैसी प्रमुख फसलें कई मंडियों में अपने-अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी से नीचे कारोबार कर रही हैं। व्यापार सूत्रों के अनुसार, अमेरिका से संभावित आयात बढ़ने की आशंका ने बाजार धारणा को प्रभावित किया है, जिससे घरेलू आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद के बीच खरीदार सतर्क रुख अपना रहे हैं।
यह गिरावट ऐसे समय आई है जब गेहूं, सरसों और चना जैसे रबी फसलें पहले से ही बेहतर उत्पादन अनुमान और पर्याप्त व्यापारिक भंडार के कारण दबाव में हैं। कई कृषि उपज मंडियों में प्रमुख जिंसो के भाव एमएसपी से 3 से 9 प्रतिशत तक नीचे चल रहे हैं, जिससे किसानों की आय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार संरचना पहले ही उत्पादकों के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी और अब आयात संबंधी अनिश्चितताओं ने दबाव को और बढ़ा दिया है। लंबे रेशे वाली कपास का भाव वर्तमान में लगभग 7,200 रुपय प्रति क्विंटल है, जबकि इसका एमएसपी 8,110 रुपय प्रति क्विंटल निर्धारित है। महाराष्ट्र में व्यापार समझौते की घोषणा के तुरंत बाद कीमतें गिरकर 6,700 रुपय प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थीं, हालांकि बाद में आंशिक सुधार देखने को मिला।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि आयात प्रवाह वास्तव में कितना बढ़ता है और सरकार घरेलू बाजार संतुलन बनाए रखने के लिए किस प्रकार की नीतिगत रणनीति अपनाती है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक सरकार सरकारी खरीद को तेज नहीं करती और आयात शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कीमतों में बड़ा सुधार मुश्किल है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी फसल को सुखाकर और साफ करके लाएं ताकि गुणवत्ता के आधार पर बेहतर दाम मिल सकें।
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