देश के कई हिस्सों में पिछले दो सप्ताह के दौरान तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल पर संभावित हीट स्ट्रेस को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि फिलहाल रात का तापमान अपेक्षाकृत कम रहने के कारण तत्काल नुकसान की आशंका नहीं जताई जा रही है। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है, जबकि मध्य भारत में तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ऊपर बना हुआ है।
राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में दिन का तापमान पहले ही 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं उत्तर और पूर्वी मैदानी इलाकों में तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल गेहूं की फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित है, क्योंकि रात का तापमान अभी भी 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे है, जिससे हीट स्ट्रेस का प्रभाव सीमित रहता है।
वर्ष 2025-26 के रबी सीजन में देशभर में रिकॉर्ड 334.1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई है। अधिकांश क्षेत्रों में फसल इस समय मिल्की स्टेज में है, जब दानों का निर्माण शुरू होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 10 से 15 दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इस अवधि में यदि तापमान तेजी से बढ़ता है तो दाने सिकुड़ सकते हैं और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
वर्ष 2022 में आई हीटवेव के कारण कई प्रमुख गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में पैदावार लगभग 20 प्रतिशत तक घट गई थी। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि इस अवधि में सिंचाई प्रबंधन सावधानी से करें और तेज हवाओं के दौरान फसल गिरने की स्थिति से बचाव के उपाय अपनाएं।
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