राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड ने अपना पहला वर्ष पूरा कर लिया है और इस दौरान भारत की हल्दी मूल्य शृंखला को मजबूत करने की दिशा में अहम प्रगति दर्ज की गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि बोर्ड की पहल से हल्दी किसानों और निर्यातकों के लिए नए अवसर खुले हैं और भारत की वैश्विक स्थिति और सुदृढ़ हुई है।
खेती, अनुसंधान, प्रसंस्करण और वैश्विक व्यापार को एकीकृत समर्थन देने के उद्देश्य से गठित इस बोर्ड ने हल्दी की खेती के विस्तार और गुणवत्ता सुधार में भूमिका निभाई है। भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा हल्दी उत्पादक और निर्यातक है। देश की 30 से अधिक देशी किस्में अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर पहचान बना रही हैं।
बोर्ड का फोकस उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने और हल्दी के औषधीय व दैनिक उपयोगों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने पर रहा है। इसके प्राथमिक क्षेत्रों में किसानों को तकनीकी सहयोग, गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्करण, बेहतर लॉजिस्टिक्स और निर्यात संवर्धन शामिल हैं। मंत्री के अनुसार, इस पहल से करीब 20 राज्यों के किसानों को बेहतर अवसंरचना, अनुसंधान सहयोग और बाजार संपर्क का लाभ मिलने की उम्मीद है, जबकि निर्यातकों को नए गंतव्यों तक पहुंच आसान होगी।
गोयल ने कहा कि खाद्य, स्वास्थ्य और न्यूट्रास्यूटिकल क्षेत्रों में बढ़ती वैश्विक मांग के बीच राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का पहला वर्ष किसानों को सशक्त बनाने और वैश्विक मसाला अर्थव्यवस्था में भारत की अग्रणी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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