मिस्र में गेहूं की कटाई अप्रैल 2026 के मध्य में शुरू होगी, जिसकी शुरुआत असवान, लक्सर और क़ेना से होगी। सरकार का लक्ष्य अपने सब्सिडी वाले ब्रेड कार्यक्रम के लिए स्थानीय स्तर पर उत्पादित 45 से 5 मिलियन टन गेहूं की खरीद करना है, जिसके लिए किसानों को समर्थन देने हेतु बुवाई क्षेत्रों का विस्तार और खरीद मूल्य में वृद्धि की जाएगी।
अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, 2025-26 के मौसम में मिस्र और इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े गेहूं आयातकों के रूप में प्रतिस्पर्धा करेंगे, और अनुमान है कि दोनों देश लगभग 13 मिलियन टन गेहूं खरीदेंगे। दोनों देशों की मजबूत मांग वैश्विक गेहूं की कीमतों और व्यापार प्रवाह को प्रभावित कर सकती है।
कनिमोझी करुणानिधि की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से भारत में अनाज खरीद योजना को मजबूत करने का आग्रह किया है। समिति ने पाया कि हाल के वर्षों में कई राज्यों में गेहूं और चावल की वास्तविक खरीद लगातार अनुमान से कम रही है।
दक्षिण अफ्रीका ने वैश्विक कीमतों में वृद्धि के बाद गेहूं आयात शुल्क में लगभग 75 प्रतिशत की कटौती कर इसे लगभग 9 डॉलर प्रति टन कर दिया है। यह जानकारी दक्षिण अफ्रीकी अनाज और तिलहन व्यापार संघ ने दी है। किसानों का कहना है कि इस कदम से स्थानीय उत्पादकों पर दबाव पड़ सकता है, वहीं ईरान से जुड़े तनाव के कारण उर्वरकों की बढ़ती लागत से गेहूं की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने 30 मार्च, 2026 से शुरू होने वाले खरीद सत्र से पहले गेहूं के एमएसपी में 160 रुपय प्रति क्विंटल की वृद्धि को मंजूरी दी। खरीद 75 जिलों में फैले 6,500 केंद्रों के माध्यम से की जाएगी, जिसमें भारतीय खाद्य निगम सहित कई एजेंसियां किसानों को सहयोग प्रदान करेंगी।
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