ई-नाम से जुड़े 1.80 करोड़ किसान, 4.82 लाख करोड़ रुपये का कारोबार

स्थानीय मंडी के आढ़तियों के सीमित दायरे और मनमाने दामों की मजबूरी को खत्म कर क्या देश भर के 1.80 करोड़ किसान अब सीधे अपने मोबाइल से देश के किसी भी कोने में अपनी फसल बेच रहे हैं? ई-नाम (e-NAM) पोर्टल पर हुए 4.82 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक कारोबार, राजस्थान की मंडियों में लगी एआई आधारित टेस्टिंग मशीनों और केंद्र सरकार द्वारा प्रति मंडी दी जा रही ₹75 लाख की सहायता के इस पूरे डिजिटल तंत्र को जाने बिना अपनी उपज बेचना सीधे मुनाफे की अनदेखी करने जैसा है।

संसद में ई-नाम के आंकड़े पेश

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने संसद में जानकारी दिए है कि 28 फरवरी 2026 तक ई-नाम यानी राष्ट्रीय कृषि बाजार मंच पर 1.80 करोड़ किसान और 2.72 लाख व्यापारी पंजीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा 4,724 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) भी इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। सरकार के अनुसार, ई-नाम पर शुरुआत से लेकर फरवरी 2026 तक 13.22 करोड़ टन कृषि उत्पादों का व्यापार हुआ है, जिसकी कुल कीमत 4,82,350 करोड़ रुपय रही है।

1,656 मंडियों का एकीकृत नेटवर्क

वर्ष 2016 में शुरू किया गया ई-नाम एक ऑनलाइन व्यापार मंच है, जो देशभर की थोक कृषि मंडियों को एकीकृत कर पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी व्यापार को बढ़ावा देता है। अब तक 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,656 मंडियां इस पोर्टल से जुड़ चुकी हैं। यह मंच किसानों को ऑनलाइन बोली के माध्यम से देशभर के खरीदारों तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य खोजने और सीधे बैंक खाते में भुगतान प्राप्त करने में सुविधा मिलती है।

मंडियों में एआई आधारित गुणवत्ता परीक्षण

तकनीकी उन्नयन के तहत राजस्थान की 134 मंडियों में एआई और एमएल आधारित गुणवत्ता जांच मशीनें लगाई गई हैं, जिससे परीक्षण का समय कम हुआ है और पारदर्शिता बढ़ी है।

प्रति मंडी 75 लाख की सहायता

सरकार ई-नाम योजना के तहत राज्यों को प्रति मंडी 75 लाख रुपय तक की सहायता भी प्रदान करती है। इस राशि का उपयोग गुणवत्ता जांच लैब, इलेक्ट्रॉनिक तौल, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और आईटी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए किया जाता है।

डिजिटल कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भविष्य

किसानों को अब अपनी फसल के सही दाम की जानकारी घर बैठे मिल रही है। 1.80 करोड़ किसानों का जुड़ना यह दर्शाता है कि ग्रामीण भारत तकनीक को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। 4.82 लाख करोड़ का कारोबार बताता है कि यदि इंफ्रास्ट्रक्चर सही हो, तो कृषि क्षेत्र देश की जीडीपी में और भी बड़ा योगदान दे सकता है।

ई-नाम पोर्टल से फसल बेचते समय 3 जरूरी बातें

फसल की गुणवत्ता जांच (Assaying) जरूर कराएं: मंडी में माल लाते ही ई-नाम लैब में अपनी उपज की गुणवत्ता जांच कराएं; एआई मशीनों से निकली जांच पर्ची पोर्टल पर अपलोड होते ही दूर-दराज के व्यापारी प्रीमियम क्वालिटी पर ऊंची बोली लगाते हैं।

पोर्टल पर बैंक खाता और मोबाइल नंबर एक्टिव रखें: ई-नाम पर बोली पूरी होते ही खरीददार सीधे ऑनलाइन भुगतान करता है; सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता पोर्टल पर सही ढंग से लिंक हो ताकि पैसा बिना देरी के खाते में आ जाए।

एफपीओ (FPO) के जरिए सामूहिक बिक्री करें: छोटे किसान अकेले बड़ी मंडी तक जाने के बजाय अपने स्थानीय एफपीओ के जरिए ई-नाम पर माल लिस्ट कराएं, जिससे ढुलाई का खर्च बचता है और सामूहिक सौदेबाजी से 10 से 15% अधिक भाव मिलता है।

निष्कर्ष: ई-नाम पोर्टल पर 4.82 लाख करोड़ रुपये का कारोबार यह साबित करता है कि भारतीय कृषि अब पारंपरिक व्यवस्था से निकलकर डिजिटल युग में मजबूती से कदम रख चुकी है। 1,656 मंडियों का यह नेटवर्क और एआई आधारित गुणवत्ता परीक्षण न केवल किसानों को उनकी मेहनत का पूरा और पारदर्शी दाम दिला रहे हैं, बल्कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाकर कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट Anil Kumar Prasad द्वारा संसद में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों, ई-नाम पोर्टल के दिशानिर्देशों और जमीनी कृषि वास्तविकताओं के निष्पक्ष अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य नीतिगत निर्णयों और डिजिटल विपणन से किसानों को अवगत कराना है। इस विषय पर अपने क्षेत्र की स्थिति और विचार जरूर साझा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. 28 फरवरी 2026 तक ई-नाम पोर्टल पर कितने किसान पंजीकृत हो चुके हैं?

उत्तर: केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 28 फरवरी 2026 तक ई-नाम मंच पर 1.80 करोड़ किसान, 2.72 लाख व्यापारी और 4,724 किसान उत्पादक संगठन (FPO) पंजीकृत हो चुके हैं।

Q2. ई-नाम पर अब तक कुल कितने मूल्य का कृषि कारोबार हुआ है?

उत्तर: पोर्टल की शुरुआत से लेकर फरवरी 2026 तक 13.22 करोड़ टन कृषि उत्पादों का व्यापार हुआ है, जिसकी कुल कीमत 4,82,350 करोड़ रुपये (लगभग 4.82 लाख करोड़) रही है।

Q3. देश भर में कितनी मंडियां ई-नाम से जोड़ी जा चुकी हैं?

उत्तर: अब तक देश के 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 1,656 थोक कृषि मंडियों को ई-नाम पोर्टल से जोड़ा जा चुका है।

Q4. मंडियों में एआई (AI) और मशीन लर्निंग मशीनों से क्या फायदा हो रहा है?

उत्तर: राजस्थान की 134 मंडियों सहित कई केंद्रों पर लगी एआई मशीनों से फसलों की गुणवत्ता और नमी की जांच मिनटों में पारदर्शी तरीके से हो जाती है, जिससे किसानों को उपज का सही ग्रेड और भाव मिलता है।

Q5. ई-नाम योजना के तहत मंडियों को कितनी सरकारी सहायता दी जाती है?

उत्तर: केंद्र सरकार ई-नाम से जुड़ने वाली मंडियों में गुणवत्ता लैब, इलेक्ट्रॉनिक तौल, ग्रेडिंग और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए प्रति मंडी ₹75 लाख तक की वित्तीय सहायता देती है।

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