देश में 40% वर्षा घाटे के बावजूद मानसून संकट से निपटने को तैयार सरकार

देश में चालू सीजन के दौरान अब तक लगभग 40 प्रतिशत वर्षा घाटा दर्ज होने के बावजूद केंद्र सरकार ने संभावित मानसूनी व्यवधानों से निपटने के लिए अपनी जिला-स्तरीय आकस्मिक योजनाएं पूरी तरह तैयार कर ली हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित ‘इंडिया इनोवेटिव क्रॉप न्यूट्रिशन कॉन्क्लेव 2026’ के दौरान कृषि आयुक्त पी. के. सिंह ने देश की तैयारियों को लेकर यह भरोसा जताया है।

उन्होंने कहा कि बेहतर सिंचाई अवसंरचना और पर्याप्त खाद्यान्न भंडार के कारण देश किसी भी मौसम संबंधी चुनौती का सामना करने के लिए पहले से कहीं अधिक तैयार है। कृषि आयुक्त ने बताया कि ये विशेष आकस्मिक योजनाएं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर तैयार की गई हैं। देश के जिन भी जिलों में वर्षा की कमी दर्ज की जाएगी, वहां स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार इन योजनाओं को तत्काल लागू किया जाएगा।

सिंह ने पिछले एक दशक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2015 के एल नीनो संकट की तुलना में भारत आज मौसम संबंधी जोखिमों से बेहतर ढंग से निपटने की स्थिति में है। पिछले दस वर्षों में देश के भीतर सिंचाई सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है, जिसने कृषि क्षेत्र की सहनशीलता और क्षमता को काफी बढ़ा दिया है।

इसके साथ ही, वर्तमान में देश के पास चावल और गेहूं का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है। यह अधिशेष भंडार उत्पादन पर किसी भी संभावित प्रतिकूल प्रभाव की स्थिति में देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगा। सरकार ने बाजार की आपूर्ति को लेकर भी अपनी रणनीति साफ कर दी है।

पी. के. सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में मानसून की बेरुखी के कारण किसी कृषि उत्पाद की घरेलू आपूर्ति में कमी आती है, तो सरकार आवश्यक कदम उठाएगी और जरूरत पड़ने पर आयात का विकल्प भी अपनाया जाएगा। आमतौर पर मानसून में देरी होने की स्थिति में देश के किसान कम अवधि और कम पानी वाली फसलों, विशेषकर दलहनों (दालों) की खेती की ओर रुख करते हैं। किसानों की यह पारंपरिक सूझबूझ फसल उत्पादन के जोखिम को काफी हद तक कम करने में मदद करती है।

कृषि आयुक्त ने आश्वस्त किया कि सरकार देश भर में मानसून की प्रगति पर लगातार और पैनी नजर रखेगी। आवश्यकता के अनुसार जिला-स्तर पर आकस्मिक योजनाओं को समय पर लागू कर कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को न्यूनतम करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

निष्कर्ष: चालू सीजन में 40% वर्षा घाटे के बावजूद, बेहतर सिंचाई अवसंरचना और पर्याप्त खाद्यान्न (चावल और गेहूं) के बफर स्टॉक के कारण भारत किसी भी मानसूनी संकट से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है। सरकार ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमानों के आधार पर जिला-स्तरीय आकस्मिक योजनाएं तैयार कर ली हैं, जिन्हें प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत लागू किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, आपूर्ति की कमी होने पर सरकार आयात के विकल्प और कम अवधि व कम पानी वाली फसलों (जैसे दलहन) के लिए किसानों की पारंपरिक सूझबूझ के सहारे कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को न्यूनतम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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