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घटा हुआ रकबा और मौसम की मार से जीरा उत्पादन घटने की आशंका..!

10/03/2026 by krishijagriti5

घटा हुआ रकबा और मौसम की मार से जीरा उत्पादन घटने की आशंका..!

भारत में वर्ष 2026 की जीरा फसल के उत्पादन में कमी आने की संभावना जताई जा रही है। कम रकबा, अनियमित मौसम और रोग प्रकोप के कारण फसल पर दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते प्रमुख निर्यात बाजारों में खेपों की आवाजाही प्रभावित होने से बाजार धारणा भी कमजोर हुई है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स (एफआईएसएस) के अनुसार, देश में जीरा उत्पादन लगभग 5.13 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 5.38 लाख टन से करीब 5 प्रतिशत कम है। 55 किलोग्राम के मानक बैग के हिसाब से यह उत्पादन लगभग 93.29 लाख बैग बैठता है, जबकि पिछले सीजन में यह 97.93 लाख बैग था।

देश के दो प्रमुख जीरा उत्पादक राज्यों में उत्पादन का रुझान अलग-अलग दिखाई दे रहा है। गुजरात में उत्पादन लगभग 27 प्रतिशत घटकर 1.83 लाख टन रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण रकबे में करीब 18 प्रतिशत की कमी और उत्पादकता में गिरावट बताया जा रहा है। इसके विपरीत राजस्थान में उत्पादन लगभग 15 प्रतिशत बढ़कर 3.29 लाख टन तक पहुंच सकता है, जहां अधिक रकबा और बेहतर पैदावार से समर्थन मिला है।

नई फसल की आवक बढ़ने से कच्चे जीरे के भाव पहले ही नरम पड़ चुके हैं और कीमतें लगभग 180 से 190 रुपय प्रति किलोग्राम तक आ गई हैं। पश्चिम एशिया में ईरान-इज़राइल तनाव के कारण निर्यात मांग भी प्रभावित हुई है। फिलहाल हाजिर बाजार में जीरे के भाव करीब 4,200 रुपय प्रति 20 किलोग्राम के आसपास चल रहे हैं और यदि भू-राजनीतिक तनाव जारी रहा तो कीमतों पर आगे भी दबाव बना रह सकता है।

हालांकि कुछ आकलनों के अनुसार, राजस्थान में बेहतर पैदावार गुजरात में कमी की आंशिक भरपाई कर सकती है। इंटरनेशनल स्पाइस कॉन्फ्रेंस 2026 में पेश अनुमानों के मुताबिक कुल उत्पादन 5 से 7 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.3 से 5.4 लाख टन तक भी पहुंच सकता है।

यह भी पढ़े: गन्ना उद्योग में बड़ा बदलाव: किसानों के लिए नई योजनाएं, मिलों के लिए बिजली सब्सिडी..!

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Filed Under: कृषि समाचार Tagged With: Cumin Market Trend, Geo Political Tensions, Jeera Blight Disease, Jeera Price, Jeera Production

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