बेल वाली फसलें जैसे लौकी, तोरई, करेला, खीरा, ककड़ी और अन्य कुकुर बिट्स में फल मक्खी एक बहुत ही गंभीर कीट है। यह कीट सीधे फल पर अंडे देता है, जिससे अंदर से फल सड़ने लगते हैं और बाजार में उनकी कीमत गिर जाती है। कई बार किसान को 30 से 50 प्रतिशत तक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए समय रहते इसका नियंत्रण करना अत्यंत आवश्यक है।
फल मक्खी की मादा कीट कोमल फलों में अंडे देती है। अंडों से निकलने वाली सूंडी फल के अंदर गूदा खाती है, जिससे फल टेढ़े-मेढ़े, सड़े हुए और बेकार हो जाते हैं। बाहर से फल सामान्य दिख सकता है, लेकिन अंदर से पूरी तरह खराब हो चुका होता है। ऐसे फल न तो बाजार में बिकते हैं और न ही खाने योग्य रहते हैं।
इस कीट के नियंत्रण के लिए केवल रासायनिक दवाओं पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। बार-बार छिड़काव से लागत बढ़ती है और कीटों में प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित हो जाती है। इसलिए एकीकृत कीट प्रबंधन पद्धति अपनाना अधिक प्रभावी और टिकाऊ समाधान है।
फल मक्खी किए को नियंत्रण करने के लिए फेरोमोन ट्रैप का उपयोग एक अत्यंत प्रभावी और वैज्ञानिक तरीका है। प्रति एकड़ 5 से 7 फेरोमोन ट्रैप लगाना चाहिए। ये ट्रैप कीटों को आकर्षित करने वाली विशेष गंध (ल्यूर) के माध्यम से काम करते हैं। यह गंध मादा कीटों को आकर्षित करती है, जिससे वे ट्रैप में फंस जाती हैं और उनकी संख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है।
ट्रैप को फसल की ऊंचाई के अनुसार लगाएं और खेत में समान दूरी पर स्थापित करें। ध्यान रखें कि ट्रैप छाया वाली जगह पर हों और हवा का प्रवाह उचित हो। ट्रैप का ल्यूर लगभग 25 दिनों तक प्रभावी रहता है, इसलिए 25 दिन के अंतराल पर इसे बदलना आवश्यक है। समय पर ल्यूर न बदलने पर उसकी गंध कमजोर हो जाती है और कीट आकर्षित नहीं होते।
फेरोमोन ट्रैप के साथ-साथ खेत की स्वच्छता भी जरूरी है। गिरे हुए और संक्रमित फलों को तुरंत इकट्ठा करके मिट्टी में गहरा दबा दें या नष्ट कर दें। इससे कीट की अगली पीढ़ी विकसित नहीं हो पाएगी। समय-समय पर हल्की गुड़ाई करने से भी मिट्टी में मौजूद प्यूपा नष्ट हो जाते हैं।
यदि प्रकोप अधिक हो, तो आवश्यकता अनुसार विशेषज्ञ की सलाह से सीमित और लक्षित रासायनिक छिड़काव करें। लेकिन प्राथमिकता हमेशा ट्रैप व जैविक नियंत्रण स्वच्छता और संतुलित पोषण को दें। किसानों के लिए सही समय पर सही कदम उठाकर फल मक्खी से होने वाले भारी नुकसान को रोका जा सकता है। कम लागत और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर ही अधिक मुनाफा संभव है।
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