फसलों से अच्छी पैदावार पाने के लिए सही पोषण प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अक्सर किसान यह मान लेते हैं कि यदि फसल को ज्यादा पोषण दिया जाए तो उत्पादन भी ज्यादा मिलेगा। इसी सोच के कारण कई किसान अलग-अलग पोषक तत्वों को एक साथ मिलाकर स्प्रे कर देते हैं या मिट्टी में एक साथ डाल देते हैं। लेकिन यह तरीका हमेशा सही नहीं होता। कई बार गलत तरीके से पोषक तत्व देने से पौधों को फायदा होने की जगह नुकसान भी हो सकता है। इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि किस पोषक तत्व को कब और कैसे देना चाहिए।
खेती में कुछ प्रमुख पोषक तत्व ऐसे होते हैं जो पौधों की बढ़वार और उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें नाइट्रोजन, कैल्शियम, पोटाश और बोरॉन प्रमुख हैं। ये सभी पोषक तत्व अलग-अलग तरीके से पौधों को लाभ पहुंचाते हैं और हर पोषक तत्व का पौधों के विकास में अलग कार्य होता है। लेकिन कई बार किसान इन सभी पोषक तत्वों को एक साथ मिलाकर देने की गलती कर बैठते हैं, जिससे उनका पूरा फायदा पौधों को नहीं मिल पाता।
नाइट्रोजन जो पौधों की बढ़वार के लिए बहुत जरूरी तत्व है। यह पत्तियों और तनों की वृद्धि को तेज करता है और पौधों को हरा-भरा बनाता है। जब पौधों को शुरुआती अवस्था में नाइट्रोजन पर्याप्त मात्रा में मिलता है तो उनकी वृद्धि अच्छी होती है और पौधे मजबूत बनते हैं। यही कारण है कि कई किसान फसल की शुरुआती अवस्था में नाइट्रोजन आधारित खाद का प्रयोग करते हैं। लेकिन यदि नाइट्रोजन को अन्य कुछ पोषक तत्वों के साथ गलत तरीके से मिलाकर दिया जाए तो इसका असर कम हो सकता है।
कैल्शियम भी पौधों के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह पौधों की कोशिकाओं को मजबूत बनाता है और पौधों की संरचना को स्थिर रखने में मदद करता है। कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा मिलने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फल भी अच्छी गुणवत्ता के बनते हैं। कई सब्जी और फल वाली फसलों में कैल्शियम की कमी होने पर फल फटने या सड़ने की समस्या भी देखने को मिलती है। इसलिए कैल्शियम का सही समय पर उपयोग करना जरूरी होता है।
पोटाश जो पौधों की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पौधों को सूखा, गर्मी और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता देता है। पोटाश से पौधों में फूल और फल बनने की प्रक्रिया भी बेहतर होती है। यही कारण है कि फल और सब्जी वाली फसलों में पोटाश का उपयोग काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
बोरॉन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है लेकिन इसका महत्व भी बहुत अधिक होता है। यह पौधों में परागण की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और फूल से फल बनने की प्रक्रिया में मदद करता है। यदि बोरॉन की कमी हो जाए तो कई बार फूल झड़ने लगते हैं और फल सही तरीके से नहीं बन पाते। इसलिए फूल और फल बनने की अवस्था में बोरॉन का उपयोग काफी लाभदायक माना जाता है।
लेकिन जब किसान इन सभी पोषक तत्वों को एक साथ मिलाकर देने की कोशिश करते हैं तो कई बार यह आपस में रासायनिक प्रतिक्रिया कर लेते हैं। इसके कारण पौधे इन पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाते। कुछ मामलों में पत्तियों पर जलन या धब्बे भी दिखाई देने लगते हैं और स्प्रे का प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए बिना जानकारी के कई पोषक तत्वों को एक साथ मिलाना सही नहीं माना जाता।
पोषक तत्व देने का सही तरीका यह है कि फसल की अवस्था के अनुसार उन्हें अलग-अलग समय पर दिया जाए। सबसे पहले फसल की शुरुआती अवस्था में नाइट्रोजन आधारित खाद देने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। जब पौधे थोड़े बड़े हो जाएं और उनमें फूल आने की अवस्था शुरू हो जाए, तब कैल्शियम और बोरॉन का स्प्रे करना फायदेमंद होता है। इससे पौधों में फूल और फल बनने की प्रक्रिया मजबूत होती है और फल गिरने की समस्या भी कम होती है।
इसके बाद पोटाश को अलग समय पर देना बेहतर माना जाता है। पोटाश पौधों को मजबूत बनाता है और फल की गुणवत्ता को सुधारता है। यदि पोटाश सही समय पर दिया जाए तो पौधे अधिक फल देते हैं और फल का आकार और गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इस प्रकार यदि सभी पोषक तत्वों को सही समय और सही मात्रा में दिया जाए तो पौधों को पूरा लाभ मिल सकता है।
किसानों के लिए यह भी जरूरी है कि वे समय-समय पर अपनी मिट्टी की जांच करवाते रहें। मिट्टी परीक्षण से यह पता चल जाता है कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्व की कमी है और किस तत्व की मात्रा पहले से पर्याप्त है। इससे किसान संतुलित पोषण प्रबंधन कर सकते हैं और अनावश्यक खर्च से भी बच सकते हैं।
संतुलित पोषण देने से फसल की वृद्धि बेहतर होती है और पौधे स्वस्थ रहते हैं। जब पौधे स्वस्थ रहते हैं तो उन पर कीट और रोगो का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम होता है। इसके साथ ही फूल और फल अधिक संख्या में बनते हैं और कुल उत्पादन में भी वृद्धि होती है। यही कारण है कि आधुनिक खेती में पोषण प्रबंधन को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
किसान याद रखें कि खेती में केवल ज्यादा खाद देना ही जरूरी नहीं है बल्कि सही समय पर सही पोषक तत्व देना अधिक महत्वपूर्ण है। यदि पोषण प्रबंधन सही तरीके से किया जाए तो कम लागत में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
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