मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के एक किसान ने पारंपरिक खेती छोड़कर व्यावसायिक पुष्प खेती अपनाते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। यह उदाहरण दर्शाता है कि सरकारी सहायता और आधुनिक तकनीक के सहारे किसान उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों के माध्यम से बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं।
भोपाल जिले के बरखेड़ा बोंदर गांव के किसान राम सिंह कुशवाहा पहले पारंपरिक फसलों में बढ़ती लागत और कम मुनाफे की समस्या से जूझ रहे थे। लगभग तीन वर्ष पहले राज्य के बागवानी विभाग से उन्हें वित्तीय और तकनीकी सहायता मिली, जिसके बाद उन्होंने संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) अपनाने का फैसला किया।
सरकारी सहयोग से उन्होंने 1,000 वर्ग फुट का पॉलीहाउस स्थापित कर गुलाब और जरबेरा फूलों की खेती शुरू की। बाद में उन्होंने सेंसर आधारित स्वचालित प्रणाली भी लगाई, जो सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और पौध संरक्षण को नियंत्रित करती है। इससे श्रम की आवश्यकता कम हुई और उत्पादन प्रबंधन अधिक कुशल हो गया।
वर्तमान में किसान एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 30,000 हाइब्रिड जरबेरा पौधों की खेती कर रहे हैं। इस इकाई में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जिस पर योजना के तहत 50 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की गई है।
यहां प्रतिदिन लगभग 1,500 से 2,000 फूलों का उत्पादन हो रहा है, जिन्हें दिल्ली, लखनऊ और जयपुर के बाजारों में भेजा जाता है। अधिकारियों के अनुसार इस मॉडल से किसान की दैनिक आय 4,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच गई है।
राम सिंह कुशवाहा के सफलता की यह कहानी स्पष्ट करती है कि तकनीक आधारित बागवानी और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग से किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बाजार उन्मुख कृषि के जरिए बेहतर आय हासिल कर सकते हैं।
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