देश में गेहूं की खेती को अधिक पोषक और उत्पादक बनाने के लिए वैज्ञानिक लगातार नई किस्मों का विकास कर रहे हैं। इसी दिशा में Indian Agricultural Research Institute द्वारा विकसित एक उन्नत और पोषक तत्वों से भरपूर किस्म Pusa Wheat 3386 किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह गेहूं की किस्म न केवल अच्छी पैदावार देती है बल्कि इसमें पोषण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण सूक्ष्म तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
पूसा गेहूं 3386 को विशेष रूप से पोषण को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसे बायोफोर्टिफाइड गेहूं की श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि इसमें सामान्य गेहूं की तुलना में सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है। इस किस्म में Iron और Zinc पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी माने जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस किस्म के दानों में लगभग 41.1 पीपीएम आयरन और लगभग 41.8 पीपीएम जिंक पाया जाता है।
आयरन और जिंक जैसे सूक्ष्म तत्व शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। आयरन की पर्याप्त मात्रा शरीर में खून की कमी को रोकने में मदद करती है, जबकि जिंक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक होता है। इसलिए इस प्रकार की पोषक तत्वों से भरपूर किस्में किसानों के लिए भी लाभकारी हैं और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर मानी जाती हैं।
फसल की अवधि की बात करें तो पूसा गेहूं 3386 मध्यम अवधि में तैयार होने वाली किस्म है। यह सामान्य परिस्थितियों में लगभग 145 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इस कारण यह उन क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है जहाँ किसान समय पर फसल की कटाई करके अगली फसल की तैयारी करना चाहते हैं।
उत्पादन क्षमता के मामले में भी यह किस्म काफी अच्छी मानी जाती है। यदि इसे वैज्ञानिक तरीके से उगाया जाए और खेत में उचित पोषण, सिंचाई तथा रोग-कीट प्रबंधन किया जाए तो इसकी औसत पैदावार लगभग 63 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त की जा सकती है। अच्छी कृषि पद्धतियों को अपनाने पर कई स्थानों पर इससे और भी बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहती है।
इस किस्म की एक और विशेषता यह है कि इसके पौधे मजबूत होते हैं और सही प्रबंधन के साथ खेत में अच्छी बढ़वार करते हैं। संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण अपनाकर किसान इस किस्म से बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
किसानों के लिए यह भी जरूरी है कि वे प्रमाणित बीज का ही उपयोग करें। प्रमाणित बीज से पौधों का अंकुरण अच्छा होता है और फसल की वृद्धि भी बेहतर होती है। इसके साथ-साथ खेत की मिट्टी की जांच करवाकर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करना चाहिए ताकि पौधों को सभी आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में मिल सकें।
आज के समय में ऐसी फसलों की आवश्यकता बढ़ रही है जो न केवल अधिक उत्पादन दें बल्कि पोषण की दृष्टि से भी बेहतर हों। पूसा गेहूं 3386 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी अधिक पोषक अनाज उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।
किसान भाइयों, यदि आप गेहूं की नई और पोषण से भरपूर किस्म अपनाना चाहते हैं तो पूसा गेहूं 3386 एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सही प्रबंधन के साथ यह किस्म अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता दोनों प्रदान कर सकती है।
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