MSP खरीद पर कमीशन बढ़ा, इथेनॉल निवेश पर क्यों मंडराया संकट?

एक तरफ देश में इथेनॉल खरीद समझौतों की रार और मंडियों में आढ़तियों के कमीशन में बढ़ोतरी, तो दूसरी तरफ रूस द्वारा गेहूं पर दोबारा निर्यात टैक्स लगाने और ब्राजील में 5 साल की सबसे कम फसल का अनुमान- वैश्विक कमोडिटी बाजार का यह तेज उलटफेर सीधे अनाज मंडियों के भावों पर असर डालने वाला है। घरेलू बायो-फ्यूल नीतियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर गेहूं-जौ की आवाजाही के इस पूरे चक्रव्यूह को जाने बिना आगामी सीजन के कृषि व्यापार को समझना नामुमकिन है।

इथेनॉल खरीद समझौते और नीतिगत चिंताएं

भारत के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने इथेनॉल संयंत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा दिया है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा, ग्रामीण विकास और किसानों की आय में वृद्धि हुई है। हालांकि, उत्पादकों और तेल विपणन कंपनियों के बीच खरीद समझौतों को लेकर हालिया विवादों ने नीतिगत स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। उद्योग से जुड़े हितधारकों का कहना है कि निवेशकों का विश्वास बनाए रखने और भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए संविदात्मक निश्चितता बनाए रखना आवश्यक है।

रूस में गेहूं पर दोबारा निर्यात शुल्क

रूस 18 मार्च से गेहूं पर 135.4 रूबल (1.67 डॉलर) प्रति टन का निर्यात शुल्क फिर से लागू करेगा, जिसकी गणना सांकेतिक निर्यात कीमतों के आधार पर की जाएगी। यह शुल्क मेसलिन पर भी लागू होगा, जबकि जौ और मक्का पर शुल्क शून्य रहेगा। इन शुल्कों की समीक्षा मॉस्को एक्सचेंज में पंजीकृत अनुबंधों के आधार पर साप्ताहिक रूप से की जाएगी।

ब्राजील में पांच साल की सबसे कम पैदावार

कोनाब के अनुसार, ब्राजील में 2026-27 के मौसम में पिछले पांच वर्षों में सबसे कम गेहूं की फसल होने की उम्मीद है, जिसका अनुमानित उत्पादन लगभग 6.9 मिलियन टन है। कम कीमतें, उर्वरकों की बढ़ती लागत और अल नीनो से जुड़े मौसम संबंधी जोखिमों के कारण किसान गेहूं की बुवाई का क्षेत्र कम कर रहे हैं।

यूक्रेन का सुस्त निर्यात और बढ़ता स्टॉक

स्पाइक ब्रोकर्स के अनुसार, यूक्रेन से गेहूं का निर्यात क्षमता से कम बना हुआ है, 1 से 12 मार्च के बीच केवल 232.9 हजार टन गेहूं का ही निर्यात हुआ है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए, मार्च में निर्यात लगभग 600 हजार टन तक पहुंच सकता है, जिससे उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्वी खरीदारों से स्थिर मांग के बावजूद स्टॉक बढ़ने का खतरा है।

आढ़तियों और सहकारी समितियों का कमीशन बढ़ा

भारत सरकार ने 2026-27 रबी विपणन सत्र से गेहूं और धान की खरीद में शामिल आढ़तियों और सहकारी समितियों के लिए कमीशन दरों में वृद्धि की है। अब भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से की जाने वाली खरीद पर अधिक कमीशन दिया जाएगा, जिसका उद्देश्य बिचौलियों को समर्थन देना और सरकारी खरीद प्रणाली में दक्षता बनाए रखना है।

नेफेड और एनसीसीएफ द्वारा 18 लाख टन खरीद

आत्मनिर्भर कृषि पहल के तहत, नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने मिलकर लगभग 18 लाख टन फसलों की खरीद की। पीएसीएस और एफपीओ नेटवर्क के माध्यम से की गई इस खरीद से लाखों किसानों को लाभ हुआ और कृषि विपणन में सहकारी समितियों की भागीदारी मजबूत हुई।

ऑस्ट्रेलिया से चीन को रिकॉर्ड जौ निर्यात

ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, जनवरी 2026 में ऑस्ट्रेलिया ने अनाज निर्यात में भारी वृद्धि दर्ज की, जिसमें जौ की खेप 14 लाख टन तक पहुंच गई। चीन से मजबूत मांग, जिसने अधिकांश खेप खरीदी, ने देश के अनाज क्षेत्र में सबसे बड़े निर्यात कार्यक्रमों में से एक को समर्थन दिया है।

इस वैश्विक कमोडिटी रिपोर्ट से जुड़ी 3 जरूरी बातें

गेहूं की वैश्विक आपूर्ति तंग होने के संकेत: ब्राजील में 5 साल की सबसे कम फसल (6.9MT), यूक्रेन का सुस्त निर्यात और रूस द्वारा दोबारा टैक्स लगाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के भाव बहुत ज्यादा नहीं गिरेंगे, जिससे भारतीय मंडियों में गेहूं की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी।

सहकारी संस्थाओं (PACS व FPO) से जुड़कर बेचें: नेफेड और एनसीसीएफ द्वारा 18 लाख टन उपज की खरीद दर्शाती है कि बिचौलियों के बजाय सीधे पैक्स और एफपीओ के जरिए अनाज और दलहन बेचने वाले किसानों को उचित और पूरा दाम मिल रहा है।

इथेनॉल नीतियों की स्थिरता पर टिकी है मक्का-गन्ना की मांग: इथेनॉल खरीद विवाद का जल्द सुलझना जरूरी है; यदि तेल कंपनियों और उत्पादकों के बीच अनुबंध स्थिर रहते हैं, तो आगामी सीजन में मक्का और गन्ने की स्थानीय मांग और भाव दोनों तेज बने रहेंगे।

निष्कर्ष: वैश्विक अनाज परिदृश्य और भारत की आंतरिक कृषि नीतियां यह साफ करती हैं कि अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी के उतार-चढ़ाव का असर अब बहुत तेजी से घरेलू स्तर पर दिखने लगा है। रूस का निर्यात शुल्क और ब्राजील की कमजोर पैदावार जहां गेहूं की कीमतों को फर्श पर जाने से रोकेंगे, वहीं भारत में सरकारी खरीद एजेंसियों की सक्रियता और आढ़तिया कमीशन में सुधार से रबी सीजन में अनाज की खरीद और उठान को नई गति मिलने की उम्मीद है।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट Anil Kumar Prasad द्वारा आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार आंकड़ों (Conab, ABS, Spike Brokers), भारत सरकार के खरीद आदेशों और जमीनी कृषि वास्तविकताओं के निष्पक्ष अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य बाजार की ताजा स्थिति से किसानों और व्यापारियों को अवगत कराना है। किसी भी व्यापारिक निर्णय से पूर्व स्थानीय मंडी भावों की पुष्टि अवश्य करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. रूस ने गेहूं पर कितना निर्यात शुल्क दोबारा लागू किया है?

उत्तर: रूस ने 18 मार्च से गेहूं और मेसलिन पर 135.4 रूबल (लगभग 1.67 डॉलर) प्रति टन का निर्यात शुल्क फिर से लागू किया है, जबकि जौ और मक्का पर शुल्क शून्य रखा गया है।

Q2. ब्राजील में आगामी सीजन के लिए गेहूं उत्पादन का क्या अनुमान है?

उत्तर: कोनाब (Conab) के अनुसार ब्राजील में 2026-27 सीजन में उत्पादन घटकर लगभग 6.9 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले 5 वर्षों का सबसे निचला स्तर है।

Q3. भारत सरकार ने रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए क्या बड़ा फैसला लिया है?

उत्तर: सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से गेहूं और धान की खरीद करने वाले आढ़तियों और सहकारी समितियों की कमीशन दरों में बढ़ोतरी की है।

Q4. नेफेड और एनसीसीएफ ने मिलकर कितनी फसलों की खरीद की है?

उत्तर: आत्मनिर्भर कृषि पहल के तहत नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) ने मिलकर पैक्स और एफपीओ के जरिए लगभग 18 लाख टन फसलों की खरीद पूरी की है।

Q5. ऑस्ट्रेलिया ने जनवरी 2026 में किस फसल का रिकॉर्ड निर्यात किया?

उत्तर: ऑस्ट्रेलिया ने जनवरी 2026 में 14 लाख टन जौ (Barley) का भारी निर्यात दर्ज किया, जिसकी सबसे बड़ी खेप चीन द्वारा खरीदी गई।

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