पंजाब में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले छह वर्षों में 51 प्रतिशत घट गई है। केंद्र सरकार के अनुसार यह संख्या 2019 में 23.01 लाख से घटकर 2025 में 11.34 लाख रह गई है। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने इस गिरावट का कारण सख्त पात्रता और सत्यापन मानदंडों को बताया।
अब योजना के तहत भूमि सीडिंग, आधार आधारित भुगतान और ई-केवाईसी जैसे अनुपालन उपाय अनिवार्य कर दिए गए हैं, ताकि लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे। सरकार के अनुसार लाभार्थियों को भुगतान राज्य सरकारों द्वारा सत्यापित आंकड़ों के आधार पर ही जारी किया जाता है। हालांकि बड़ी संख्या में किसान अभी भी इन आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 1.46 लाख किसानों की भूमि सीडिंग नहीं हुई, 1.34 लाख किसानों की ई-केवाईसी लंबित है, जबकि 46,000 से अधिक किसानों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं हैं। राज्य अधिकारियों का कहना है कि इन प्रक्रियाओं को पूरा कराने के लिए गांव स्तर पर शिविरों और सेवा केंद्रों के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है।
कुल मिलाकर, लाभार्थियों की संख्या में आई गिरावट सख्त सत्यापन व्यवस्था के साथ-साथ किसानों में अनुपालन की कमी को भी दर्शाती है।पंजाब में लाभार्थियों की संख्या का आधा होना केवल एक डेटा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि वह केवल ‘पात्र’ किसानों तक ही लाभ पहुंचाना चाहती है और पारदर्शिता के लिए ये कदम जरूरी हैं।
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