घरेलू उत्पादन में कमी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दलहन आपूर्ति स्थिर बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार म्यांमार के साथ दलहन आयात समझौते को 2025-26 के बाद पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही केंद्र ने 2026-27 के लिए तूर के अतिरिक्त 1 लाख टन आयात का प्रस्ताव भी रखा है, जो मौजूदा प्रतिबद्धताओं से अधिक होगा। वर्तमान समझौते के तहत हर वर्ष 2.5 लाख टन उड़द और 1 लाख टन तूर आयात की अनुमति है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब देश में दलहनों की संरचनात्मक कमी बनी हुई है। देश में कुल मांग 280 से 290 लाख टन के आसपास है, जबकि उत्पादन 240 से 250 लाख टन के बीच रहने का अनुमान है। वर्ष 2025-26 में प्रमुख दलहनों के उत्पादन में और गिरावट की आशंका है, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है। इस परिदृश्य में म्यांमार भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जनवरी 2025-26 के दौरान तूर आयात में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि उड़द आयात भी बढ़ा है। सरकार का मानना है कि इस समझौते के विस्तार से कीमतों को स्थिर रखने, पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच खाद्य सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
म्यांमार के साथ दाल आयात समझौते को 5 साल और बढ़ाना भारत की ‘खाद्य सुरक्षा रणनीति’ का एक मास्टरस्ट्रोक है। यह न केवल भारतीय उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत देगा, बल्कि दालों के बफर स्टॉक को बनाए रखने में भी मदद करेगा। हालांकि, लंबी अवधि में भारत का लक्ष्य ‘आत्मनिर्भर’ बनना है, लेकिन तब तक इस तरह के द्विपक्षीय समझौते बाजार की स्थिरता के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होंगे।
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