पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के मसाला व्यापार, खासकर ब्यादगी मिर्च बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। निर्यात में बाधा और बढ़ती माल ढुलाई लागत के कारण बाजार पर दबाव बढ़ गया है। पिछले दो हफ्तों में खाड़ी देशों को होने वाला मिर्च निर्यात लगभग ठप हो गया है। शिपिंग में देरी और कंटेनरों की कमी के चलते मुंबई और चेन्नई बंदरगाहों पर बड़ी मात्रा में माल फंसा हुआ है।
निर्यातकों के अनुसार माल ढुलाई और बीमा लागत में तेज बढ़ोतरी हुई है, खासकर ईरान, इज़राइल और अमेरिका के लिए भेजे जाने वाले खेप पर। वैकल्पिक मार्ग भी महंगे हो गए हैं, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ा है। इन व्यवधानों के चलते भुगतान में देरी और आपूर्ति शृंखला में बाधा देखी जा रही है, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है। व्यापारी फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो निर्यात कमजोर रहने के कारण घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि लागत पहले से ही ऊंची बनी हुई है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ सकती है।
ब्यादगी मिर्च का बाजार इस समय ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और युद्ध के हालात ही यह तय करेंगे कि इस साल किसानों के घर में खुशहाली आएगी या मिर्च का यह तीखापन उनकी आंखों में आंसू बनकर रह जाएगा। सरकार को चाहिए कि इस संकट की घड़ी में निर्यातकों को मालभाड़े में सब्सिडी दे और नए वैकल्पिक बाजारों की तलाश करे।
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