यह तस्वीर बहुत कुछ कह रही है। खेत में खड़ी गेहूं की फसल लगभग पक चुकी थी, लेकिन अचानक आई बारिश और तेज हवा ने उसे जमीन पर गिरा दिया। इसे लॉजिंग फसल का गिरना कहा जाता है, और इस स्थिति में किसान को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। जब फसल कटाई के करीब होती है और उसी समय बारिश या आंधी आ जाती है, तो बालियां झुककर जमीन पर लग जाती हैं।
इससे दाने काले पड़ने लगते हैं, अंकुरण शुरू हो सकता है और गुणवत्ता खराब हो जाती है। ऐसी फसल को मंडी में अच्छा भाव भी नहीं मिलता। मेहनत साल भर की होती है, लेकिन नुकसान कुछ ही घंटों में हो जाता है। आपकी बात बिल्कुल सही है- पहले धान में पानी से नुकसान हुआ और अब गेहूं भी इसी मौसम की मार झेल रहा है।
यह आज के बदलते मौसम का असर है, जहां बिना मौसम बारिश किसानों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है। अब ऐसी स्थिति में क्या करें, यह जानना बहुत जरूरी है। सबसे पहले, खेत में पानी जमा है तो तुरंत निकासी की व्यवस्था करें। पानी ज्यादा देर तक खड़ा रहेगा तो दाने सड़ सकते हैं। कोशिश करें कि खेत जल्दी सूख जाए।
दूसरा, जो फसल गिर गई है उसे ज्यादा देर तक ऐसे ही न छोड़ें। जैसे ही मौसम साफ हो, जल्दी कटाई करें। देर करने से दाने अंकुरित होने लगते हैं और नुकसान बढ़ता है। तीसरा, कटाई के बाद फसल को धूप में अच्छे से सुखाएं। अगर नमी रह गई तो भंडारण में दिक्कत आएगी और फसल खराब हो सकती है।
चौथा, अगर कुछ बालियां अभी खड़ी हैं, तो उन पर ध्यान दें और पहले उसी हिस्से की कटाई करें ताकि जो बच सकता है, उसे बचा लिया जाए।किसानों के लिए यह समय हिम्मत हारने का नहीं है। खेती में मौसम का जोखिम हमेशा रहता है, लेकिन सही समय पर सही कदम उठाकर नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है।
साथ ही, अगर आपने फसल बीमा कराया है तो तुरंत अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी या बीमा एजेंट को सूचना दें, ताकि आपको मुआवजा मिल सके। यह दर्द सिर्फ एक किसान का नहीं है, बल्कि हर उस किसान का है जो मौसम के भरोसे अपनी जिंदगी चलाता है। लेकिन किसान की ताकत यही है कि वह हर नुकसान के बाद फिर खड़ा होता है और अगली फसल की तैयारी करता है।
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