केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों में असमय बारिश और ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति की देशव्यापी समीक्षा शुरू कर दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रभावित किसानों को समय पर राहत पहुंचाने के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। खराब मौसम का असर खासतौर पर कटाई से पहले खड़ी फसलों पर पड़ा है, जिससे नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
इसको देखते हुए अधिकारियों को तुरंत सर्वे कर नुकसान का आकलन करने और राहत वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। एक उच्च स्तरीय बैठक में मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मुआवजा प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि किसानों को होने वाली आर्थिक परेशानी को कम किया जा सके। इस बीच खरीद सीजन की तैयारियां भी जारी हैं।
मंत्री ने बताया कि गेहूं और धान की एमएसपी पर खरीद जल्द शुरू होगी, जबकि सरकार ने दलहनों की खरीद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मंत्री ने आगे बताया कि आगामी खरीफ सीजन के लिए केंद्र सरकार क्षेत्र-विशिष्ट रणनीति अपनाएगी, जिसके तहत देश को पांच जोनों में विभाजित किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय बैठकों की शुरुआत जयपुर (7 अप्रैल), लखनऊ (17 अप्रैल) और ओडिशा (24 अप्रैल) में होने वाली बैठकों से की जाएगी।
फसल खराब होने से न केवल किसान की लागत डूब गई है, बल्कि आने वाले समय में अनाज की कीमतों में उछाल आ सकता है। सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शी तरीके से सर्वे करने और भ्रष्टाचार मुक्त मुआवजा वितरण की है। यह घटना एक बार फिर चेतावनी है कि ‘क्लाइमेट चेंज’ अब हमारे खाद्य सुरक्षा चक्र को सीधा निशाना बना रहा है। संकट की इस घड़ी में किसान को केवल वादों की नहीं, बल्कि तुरंत आर्थिक मदद की जरूरत है। प्रशासन को चाहिए कि कागजी कार्रवाई से ऊपर उठकर धरातल पर मदद पहुँचाए।
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