केंद्रीय कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों से संकेत मिलता है कि चालू शीतकालीन यानी रबी मौसम में खेती का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। रबी फसलों का कुल रकबा 2 जनवरी तक 634.14 लाख हेक्टेयर पर पहुँच गया, जो बीते वर्ष की इसी अवधि के 617.74 लाख हेक्टेयर की तुलना में 16.4 लाख हेक्टेयर अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विस्तार उत्पादन में मजबूती, किसानों की आय में सुधार और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण में सहायक हो सकता है।
आंकड़ों के अनुसार, गेहूं की बुवाई में ठोस बढ़त दर्ज की गई है। इस प्रमुख रबी फसल का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 328.04 लाख हेक्टेयर था। दालों की खेती में भी सुधार देखने को मिला है। उड़द, मसूर, चना और मूंग जैसी दालों का कुल बोया गया क्षेत्रफल 3.44 लाख हेक्टेयर की वृद्धि के साथ 134.3 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
मोटे अनाज या मिलेट्स की ओर भी किसानों का रुझान बढ़ता दिख रहा है। ज्वार, बाजरा और रागी का रकबा बढ़कर 51.79 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 50.66 लाख हेक्टेयर था। इसके अलावा तिलहन फसलों में भी मजबूती दर्ज की गई है। सरसों और रेपसीड सहित तिलहनों का रकबा 93.27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 96.3 लाख हेक्टेयर हो गया है, जिससे खाद्य तेल उत्पादन को लेकर उम्मीदें जगी हैं।
कृषि अधिकारियों के मुताबिक, बुवाई क्षेत्र में यह समग्र वृद्धि मुख्य रूप से बेहतर मानसूनी वर्षा का परिणाम है। अच्छी बारिश के चलते असिंचित क्षेत्रों में भी समय पर और बड़े पैमाने पर बुवाई संभव हो सकी। आने वाले समय में मौसम की अनुकूलता बनी रहने पर रबी फसलों की पैदावार बेहतर रहने की संभावना जताई जा रही है।
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