इस समय गेहूं, सरसों और अन्य फसलों की कटाई का सीजन चल रहा है और तेज गर्मी व सूखी हवाओं के कारण खेतों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई जगहों पर थोड़ी सी लापरवाही के कारण सैकड़ों बीघा फसल जलकर राख हो जाती है, जिससे किसान की पूरे साल की मेहनत और कमाई कुछ ही मिनटों में खत्म हो जाती है। ऐसे समय में सबसे जरूरी है कि हम पहले से सतर्क रहें और आग से बचाव के लिए सही प्रबंधन अपनाएं। क्योंकि खेती में नुकसान से बचना ही असली मुनाफा है।
सबसे पहला और महत्वपूर्ण उपाय है खेत के चारों तरफ सुरक्षा पट्टी बनाना। खेत की मेड़ के आसपास 5 से 7 फीट चौड़ी पट्टी में फसल को पहले ही काट लें या जुताई कर दें। इससे अगर बाहर कहीं आग लगती है तो वह सीधे आपकी खड़ी फसल तक नहीं पहुंच पाएगी। यह तरीका बहुत साधारण है लेकिन अत्यंत प्रभावी है और हर किसान को इसे जरूर अपनाना चाहिए। खासकर जिन क्षेत्रों में सड़क या खाली जमीन खेत के पास हो, वहां यह और भी जरूरी हो जाता है।
दूसरा बड़ा कारण होता है लापरवाही। कई बार खेतों के आसपास बीड़ी-सिगरेट पीने या सूखी घास में माचिस जलाने से आग लग जाती है। इसलिए खेत के पास धूम्रपान बिल्कुल न करें और मजदूरों को भी इसके लिए सख्त निर्देश दें। थोड़ी सी चिंगारी भी तेज हवा में बड़ी आग का रूप ले सकती है, इसलिए इस छोटी सी आदत पर नियंत्रण बहुत जरूरी है।
तीसरा महत्वपूर्ण बिंदु है बिजली की लाइन। जिन खेतों के ऊपर से बिजली के तार गुजरते हैं, वहां स्पार्किंग का खतरा रहता है। ढीले तार, पुराने कनेक्शन या ट्रांसफार्मर की खराबी से अचानक आग लग सकती है। इसलिए समय-समय पर इन तारों की निगरानी करें और यदि कहीं कोई समस्या दिखे तो तुरंत बिजली विभाग को सूचना दें। यह सतर्कता आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।
चौथा और सबसे उपयोगी देसी उपाय है पानी की तैयारी। हर किसान के पास स्प्रे मशीन (छिड़काव मशीन) होती है, जिसे आमतौर पर दवा छिड़कने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस समय उसी मशीन को आप आग बुझाने के काम में भी ले सकते हैं। उसमें साफ पानी भरकर तैयार रखें ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत तेज बौछार से आग को काबू में किया जा सके। कई बार दमकल समय पर नहीं पहुंच पाती, ऐसे में यह देसी जुगाड़ बहुत कारगर साबित होता है।
इसके अलावा ट्रैक्टर से जुताई भी आग रोकने का एक मजबूत तरीका है। अगर खेत में कहीं आग लग जाए तो तुरंत ट्रैक्टर लेकर आग के चारों ओर गहरी जुताई कर दें। इससे आग का फैलाव रुक जाता है और बाकी फसल सुरक्षित बच सकती है। यह तरीका बड़े खेतों में विशेष रूप से बहुत प्रभावी होता है और कई किसानों ने इससे अपनी फसल बचाई है।
साथ ही खेत में सूखी पराली या कचरे को इकट्ठा करके न रखें। सूखी सामग्री आग को तेजी से फैलाती है, इसलिए समय-समय पर खेत की सफाई करते रहें। जहां संभव हो, नियंत्रित तरीके से निपटान करें और खेत को साफ-सुथरा रखें। इससे आग लगने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि तेज हवा के समय खेत में कोई भी ऐसा काम न करें जिससे चिंगारी पैदा हो सकती हो। जैसे वेल्डिंग, मशीन की मरम्मत या जलती हुई वस्तुओं का उपयोग। यह छोटी-छोटी सावधानियां ही बड़े नुकसान को रोकती हैं।
अंत में यही कहना है कि खेती में जोखिम हमेशा रहता है, लेकिन सही समय पर सही कदम उठाकर हम नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। आग एक ऐसी आपदा है जो कुछ ही मिनटों में सब कुछ खत्म कर देती है, इसलिए इसे हल्के में बिल्कुल न लें। सतर्क रहें, अपने परिवार और मजदूरों को भी जागरूक करें और सुरक्षा उपायों को अपनी खेती का हिस्सा बनाएं।
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