संसदीय स्थायी समिति ने दलहन और तिलहन फसलों की 100 प्रतिशत एमएसपी पर खरीद की सिफारिश करते हुए कहा है कि इससे किसानों को मूल्य सुरक्षा मिलेगी और देश की आयात निर्भरता घटेगी। लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का करीब 56 प्रतिशत आयात करता है, जबकि 20 लाख टन से अधिक दलहन भी विदेशों से मंगाना पड़ता है। इससे घरेलू बाजार वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बना रहता है।
समिति ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा योजना) के तहत खरीद दायरे को बढ़ाकर तुअर, उड़द और मसूर के पूरे उत्पादन को कवर करने का सुझाव दिया है। साथ ही दूरदराज क्षेत्रों में खरीद केंद्र मजबूत करने, डिजिटल सिस्टम और हेल्पलाइन के जरिए पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में आयात नीति को भी लचीला बनाने की सिफारिश की गई है।
सुझाव दिया गया है कि यदि पाम ऑयल की वैश्विक कीमत 800 डॉलर प्रति टन से नीचे जाती है, तो 20 प्रतिशत सेफगार्ड ड्यूटी लगाई जाए, ताकि घरेलू कीमतों में गिरावट रोकी जा सके। उत्पादन बढ़ाने के लिए पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में दलहन-तिलहन क्लस्टर, माइक्रो इरिगेशन का विस्तार और जल संरक्षण आधारित खेती को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
इसके अलावा समिति ने एफपीओ को मजबूत करने, वैल्यू एडिशन बढ़ाने, ‘भारत दाल’ के विस्तार और ‘भारत तेल’ ब्रांड शुरू करने का सुझाव दिया है। महिलाओं के लिए 40 प्रतिशत लाभ आरक्षित करने और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। समिति का मानना है कि खरीद, व्यापार नीति, तकनीक और बाजार ढांचे में समन्वित सुधार ही देश को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय स्थिर रखने में निर्णायक साबित होंगे।
यह रिपोर्ट एक ‘होलिस्टिक अप्रोच’ (समग्र दृष्टिकोण) की वकालत करती है। यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो न केवल भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा (आयात कम होने से), बल्कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलेगा, जिससे अंततः भारत खाद्य तेल और दालों के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बन सकेगा।
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