आजकल 20% इथेनॉल मिश्रण यानी E20 को लेकर बहुत चर्चा हो रही है। सरकार का उद्देश्य साफ है-पेट्रोल पर निर्भरता कम करना, पर्यावरण सुधारना और किसानों की आय बढ़ाना। लेकिन जब हम खेत स्तर की स्थिति देखते हैं, तो कई सवाल खड़े होते हैं जिन पर खुलकर चर्चा जरूरी है। सबसे पहले बात करते हैं मक्का की। इथेनॉल उत्पादन में करीब 35 से 40 प्रतिशत हिस्सेदारी मक्का की मानी जाती है, लेकिन कई क्षेत्रों में किसानों को मक्का का भाव MSP से काफी नीचे मिलता दिख रहा है।
जब किसान को उसकी फसल का सही दाम नहीं मिलता, तो इथेनॉल जैसे बड़े प्रोग्राम का फायदा उस तक सीधे नहीं पहुंच पाता। इसका सीधा असर किसान की लागत और मुनाफे पर पड़ता है। अब गन्ने की स्थिति देखें तो तस्वीर और गंभीर लगती है। रिपोर्ट्स के अनुसार गन्ना किसानों का बकाया भुगतान काफी बढ़ गया है, जो हजारों करोड़ तक पहुंच चुका है। भुगतान में देरी का मतलब है कि किसान की अगली फसल की तैयारी प्रभावित होती है, कर्ज बढ़ता है और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जाता है।
जबकि इथेनॉल उत्पादन में गन्ने की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत से ज्यादा है, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस सिस्टम का लाभ आखिर किसे मिल रहा है? किसान संगठनों की चिंता भी यही है कि यदि उत्पादन बढ़ रहा है, नई नीतियां आ रही हैं, तो उसका सीधा फायदा किसानों तक समय पर और सही कीमत के रूप में क्यों नहीं पहुंच रहा। केवल उत्पादन बढ़ाने से समस्या हल नहीं होती, जब तक भुगतान समय पर और उचित मूल्य पर न मिले।
यह भी समझना होगा कि इथेनॉल नीति पूरी तरह गलत नहीं है। इसके कई फायदे हैं- देश का आयात बिल कम होता है, पर्यावरण को लाभ मिलता है, और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलता है। लेकिन नीति की सफलता तभी मानी जाएगी जब उसका लाभ सबसे नीचे खड़े किसान तक पहुंचे। किसान के नजरिए से सबसे जरूरी तीन बातें हैं: पहला, फसल का उचित और सुनिश्चित मूल्य। दूसरा, भुगतान समय पर मिले। तीसरा, बाजार में पारदर्शिता और बिचौलियों की भूमिका कम हो।
अगर ये तीनों चीजें सही हो जाएं, तो इथेनॉल जैसी योजनाएं वास्तव में किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं। लेकिन अगर केवल आंकड़ों में विकास दिखे और जमीन पर किसान परेशान रहे, तो यह चिंता का विषय जरूर है। किसान साथियों, इस मुद्दे पर जागरूक रहना बहुत जरूरी है। सही जानकारी रखें, अपनी फसल का सही मूल्य मांगें और संगठित होकर अपनी आवाज उठाएं। नीचे कमेंट में जरूर बताएं कि आपके क्षेत्र में मक्का और गन्ने का क्या भाव चल रहा है और पेमेंट समय पर मिल रहा है या नहीं।
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