आजकल सोशल मीडिया पर एक बात तेजी से वायरल हो रही है कि सरकारी नीतियों के कारण किसान मजदूर बनता जा रहा है। यह बात सुनने में भले ही भावनात्मक लगे, लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है और हमें इससे क्या सीखना चाहिए-यह समझना बहुत जरूरी है। अगर हम इतिहास देखें तो आज़ादी के समय देश की अर्थव्यवस्था में खेती का योगदान बहुत ज्यादा था।
उस समय ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर थे और GDP में कृषि की हिस्सेदारी भी काफी बड़ी थी। लेकिन आज के समय में यह हिस्सा घटकर लगभग 15 से 18 प्रतिशत रह गया है। इसका मतलब यह नहीं कि खेती खत्म हो रही है, बल्कि उद्योग और सेवा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़े हैं, जिससे प्रतिशत कम दिखाई देता है। लेकिन असली चिंता की बात यह है कि आज भी लगभग 40 से 45 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है, जबकि आमदनी उतनी नहीं बढ़ी। यही कारण है कि कई किसान खेती छोड़कर मजदूरी या दूसरे कामों की तरफ जा रहे हैं।
यह स्थिति धीरे-धीरे एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। किसानों के लिए सबसे बड़ा कारण है खेती की बढ़ती लागत। आज बीज, खाद, दवाइयां, डीजल-सब कुछ महंगा हो चुका है। लेकिन फसल का दाम उस हिसाब से नहीं बढ़ता। जब लागत बढ़े और मुनाफा ना बढ़े, तो खेती अपने आप घाटे का सौदा लगने लगती है। यही वजह है कि किसान मजबूरी में खेती छोड़ने का सोचता है।
दूसरी तरफ, जमीन अधिग्रहण भी एक बड़ा मुद्दा है। विकास के नाम पर सड़क, फैक्ट्री और अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन ली जाती है। कई बार किसानों को उचित मुआवजा या स्थायी आय का विकल्प नहीं मिल पाता, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है।
अगर हम दूसरे देशों की बात करें, तो वहां सरकारें अपने किसानों को ज्यादा मजबूत समर्थन देती हैं। जैसे United States, China और European Union में किसानों को सब्सिडी, बीमा और दाम की गारंटी मिलती है। भारत में भी योजनाएं हैं, लेकिन उनका फायदा हर किसान तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता।
अब सवाल यह है कि समाधान क्या है..!
सबसे पहले, किसानों को अपनी खेती को वैज्ञानिक बनाना होगा। सिर्फ परंपरागत तरीके से खेती करने से आज के समय में अच्छा मुनाफा निकालना मुश्किल हो गया है। हमें नई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, हाई-डेंसिटी प्लांटिंग और बेहतर बीजों का इस्तेमाल करना होगा।
दूसरा, फसल का सही दाम मिलना जरूरी है। जब तक किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक खेती लाभकारी नहीं बन सकती। इसके लिए सरकार की योजनाओं के साथ-साथ हमें बाजार की समझ भी बढ़ानी होगी।
तीसरा, वैल्यू एडिशन पर ध्यान देना होगा। अगर हम अपनी फसल को सीधे बेचने के बजाय प्रोसेस करके बेचें, जैसे टमाटर से सॉस या दूध से अन्य उत्पाद, तो मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है।
चौथा, फसल चक्र और जैविक तरीकों को अपनाकर लागत को कम किया जा सकता है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी और लंबे समय तक फायदा मिलेगा। अंत में, किसानों को यह समझना जरूरी है कि खेती कोई जुआ नहीं है, बल्कि एक विज्ञान है। अगर हम सही जानकारी, सही तकनीक और सही समय पर सही निर्णय लें, तो खेती आज भी सबसे लाभकारी व्यवसाय बन सकती है।
भावनाओं में बहकर फैसले लेने के बजाय किसानों को समझदारी से काम लेना होगा। तभी किसान अपने खेत, अपनी आय और अपने भविष्य को सुरक्षित कर पाएंगे।
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