केंद्र सरकार ने तूर, उड़द और पीली मटर की आयात नीति को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाने का फैसला किया है। देश में दालों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, तूर और उड़द का आयात पूरी तरह से शुल्क-मुक्त बना रहेगा। वहीं, पीली मटर पर पूर्व की तरह 30 प्रतिशत आयात शुल्क लागू रहेगा, जिससे घरेलू किसानों के हितों और उपभोक्ताओं की जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
पीली मटर के आयात के नियमों में सरकार ने कुछ लचीलापन भी दिखाया है। अब इसके आयात के लिए कोई न्यूनतम आयात मूल्य या बंदरगाह संबंधी प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। हालांकि, पारदर्शिता और बाजार की निगरानी बनाए रखने के लिए आयातकों को ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इस निगरानी प्रणाली के जरिए सरकार आयात की मात्रा और स्टॉक की वास्तविक स्थिति पर नजर रख सकेगी, ताकि बाजार में किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी या जमाखोरी को रोका जा सके।
इस वित्त वर्ष के दौरान दालों के कुल आयात में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट आने की संभावना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कुल आयात घटकर 52.3 लाख टन रह सकता है, जो पिछले साल के रिकॉर्ड 73 लाख टन के मुकाबले काफी कम है। आयात में इस कमी का मुख्य कारण घरेलू स्तर पर बेहतर उपलब्धता और वैश्विक स्तर पर दालों की कीमतों में आई गिरावट को माना जा रहा है।
हालांकि, आयात घटने के बावजूद घरेलू उत्पादन को लेकर कुछ चिंताएं अब भी बनी हुई हैं। विशेष रूप से तूर के उत्पादन में 4.66 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया गया है, जिससे इसकी कुल पैदावार 34.55 लाख टन तक सीमित रह सकती है। इसके साथ ही उड़द का उत्पादन भी खरीफ और रबी दोनों सीजन में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है।
आयात नीति में इस विस्तार के पीछे वैश्विक कारण भी जिम्मेदार हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण समुद्री ढुलाई की लागत में वृद्धि हुई है, जबकि अल नीनो के प्रभाव से मानसून पर पड़ने वाले संभावित असर ने भी सरकार को सतर्क कर दिया है। वर्तमान में चना और मसूर पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क प्रभावी है, जबकि पीली मटर पर उच्च शुल्क बरकरार रखा गया है।
यह भी पढ़े: यूपी, हरियाणा और कर्नाटक में 11,698 करोड़ की एमएसपी खरीद को मंजूरी
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें एवं कृषि जागृति, स्वास्थ्य सामग्री, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।
